सामाजिक रूप से जागरूक और प्रासंगिक प्रबन्धन स्कूल बने रहने के लिए और और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए, आईआईएम इंदौर लगातार प्रयास करता रहता है। इस मिशन के अनुरूप, यह  संस्थान अब मध्य प्रदेश सरकार की सी.एम. राइज़ परियोजना का हिस्सा बन गया है, जिसमें संस्थान को  प्राचार्यों के लिए क्षमता निर्माण पाठ्यक्रम संचालित करने की जिम्मेदारी मिली है।

पहले चरण में 276 प्राचार्यों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

इस परियोजना का उद्देश्य दस वर्षों की समय सीमा में 9200 स्कूलों का समग्र विकास करना है। इसके तहत, आईआईएम इंदौर सी.एम. राइज़ के पहले चरण में 276 लीडर्स के लिए एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम  (कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम) आयोजित कर रहा है। 13 दिसंबर से क्षमता निर्माण कार्यक्रम की पहली बैच प्रारंभ की गई है,  इसमें 66 प्राचार्यों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक एस. धनाराजू द्वारा किया गया।

आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमाँशु राय ने कहा कि ” संस्थान हमेशा सभी के उत्थान में योगदान देने के लिए उत्सुक रहा है, और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हम सी.एम. राइज़ का हिस्सा बनकर प्रसन्न हैं। मध्य प्रदेश सरकार की यह परियोजना न केवल हजारों स्कूलों के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि विद्यार्थियों के कौशल, रुचियों और प्रतिभा की पहचान करके और उन्हें राष्ट्र के सक्षम नेताओं और प्रबंधकों के रूप में विकसित करके उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करती है।”

उन्होंने आगे बताया, आईआईएम इंदौर का यह अनूठा क्षमता निर्माण पाठ्यक्रम इन सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षित करने में सहायक होगा। यह पाठ्यक्रम मध्य प्रदेश में पब्लिक-स्कूल परिदृश्य के लिए प्रासंगिक रूप से तैयार किया गया है। आईआईएम इंदौर प्रशिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए व्याख्यान, केस स्टडी, चर्चा, समूह गतिविधियों, फ़ील्ड विजिट और निर्धारित पठन सामग्री के विवेकपूर्ण मिश्रण का उपयोग करेगा।

पहले वर्ष में किया गया 350 स्कूलों का चयन

स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि शमी ने बताया कि शिक्षा देश के भविष्य की आधारशिला है और सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत हुई पहल को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार की इस योजना के प्रथम वर्ष में हम 350 स्कूलों का चयन कर रहे हैं। इनमें आदिवासी, सामान्य और पिछड़े क्षेत्र के स्कूलों को चिन्हित किया है। यहां शिक्षा के विश्व स्तरीय मापदंडों को अपनाया जाएगा।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *