बीते वर्ष से महामारी के कारण हम सबने ही ज़्यादातर समय घर से काम करके ही बिताया है। ऐसे में सामान्य जीवन की जद्दोजहद से ऊब जाना लाज़मी है। तो अगर आप अपनी बोरियत को दूर करने के लिए एक हटके योजना की तलाश कर रहे हैं, तो हम आपके लिए एक मज़ेदार विकल्प लाये हैं। इंदौर से उज्जैन के जंतर मंतर तक का रास्ता 80 मिनट की ड्राइव में तय हो सकता है और यह सामान्य जीवन से हटकर एक रोमांचक दिन बिताने का उत्तम विकल्प साबित हो सकता है। जंतर मंतर में आप उन तरीकों के बारे में जान सकते हैं जिनके द्वारा पिछले युग में खगोलीय वस्तु (जो ब्रह्माण्ड में प्राकृतिक रूप से पायी जाती है) की परिक्रमा और स्थिति की गणना की जाती थी। 1725 में निर्मित, यह भारत की एकमात्र प्राचीन वेधशाला है जहाँ आज भी शोध कार्य जारी है। अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले इस खगोलीय स्मारक का एक निःशुल्क वर्चुअल भ्रमण करने के लिए आगे पढ़ें।

जंतर मंतर का इतिहास और उद्देश्य

अंबर (आधुनिक राजस्थान) के महाराजा, सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 और 1727 के बीच अपने मूल क्षेत्र में पांच खगोलीय वेधशालाओं की स्थापना की। गणित और खगोल विज्ञान के लिए अपने जुनून के कारण, जय सिंह ने पहले के वेधशालाओं के दृष्टि-आधारित डिजाइनों में अनुकूलित किया और जोड़ा जिससे खगोलीय माप के लिए एक अनूठी संरचना स्थापित हो सके।

जंतर मंतर, जिसे वेधशाला के नाम से भी जाना जाता है, में 13 वास्तुशिल्प खगोल विज्ञान यंत्र शामिल हैं और इसे 1725 में उज्जैन में बनाया गया था। जंतर मंतर नाम दो शब्दों-‘यंत्र’ और ‘मंत्र’ से मिलकर बना है, जिसका एक साथ अर्थ होता है ‘गणना यंत्र’। जंतर मंतर के निर्माण के पीछे प्राथमिक उद्देश्य खगोलीय गणनाओं द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों को चित्रित करना और संकलित करना था, जिसके परिणामों ने सूर्य, ग्रहों और उनके चंद्रमाओं की गति के अध्ययन में मदद की है।

‘भारत के ग्रीनविच’ की खोज करें

क्या आप जानते हैं? ग्रीनविच को सार्वभौमिक रूप से प्रमुख मध्याह्न रेखा के रूप में स्वीकार किए जाने से पहले, उज्जैन को भारत में समय के लिए केंद्रीय मध्याह्न रेखा के रूप में माना जाता था। उज्जैन, इंदौर से 56 किमी की दूरी पर स्थित है, भौगोलिक रूप से सटीक स्थान पर स्थित है जहां शून्य देशांतर और कर्क रेखा मिलती है, यही कारण है कि इसे ‘भारत का ग्रीनविच’ कहा जाता है। जंतर मंतर के बाहर एक बड़े ग्लोब पर कर्क रेखा पर उज्जैन की स्थिति देखी जा सकती है।

तारामंडल में सितारों की एक झलक पाएं

वेधशाला में 12 मीटर के गुंबद और 125 सीटों के साथ एक संकर तारामंडल है। यह तारामंडल ग्रहों, सितारों, नक्षत्रों और आकाशगंगाओं पर 20 और 30 मिनट के शो दिखाता है। कार्यक्रम कम से कम 10 लोगों के लिए 30 मिनट के अंतराल पर उपलब्ध हैं। शो के लिए टिकट काउंटर से अलग से खरीदना पड़ता है, क्योंकि यह प्रवेश शुल्क में शामिल नहीं है।

जंतर मंतर पर उपकरणों की सूची

सनडायल (सम्राट यंत्र के नाम से भी जाना जाता है)

नदी वलय यंत्र

शंखू यंत्र

दिगंशा यंत्र

नॉक नॉक 

1923 में, उज्जैन वेधशाला, जिसे अब सरकारी जीवाजी वेधशाला के रूप में जाना जाता है, को ग्वालियर के महाराजा माधव राव सिंधिया द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। साइट पर अभी भी खगोलीय अध्ययन किए जा रहे हैं, यह वेधशाला हर साल ग्रहों की दैनिक गति और स्थिति को रिकॉर्ड करते हुए एक पंचांग और एक पत्रिका प्रकाशित करती है।

स्थान: शासकीय जीवाजी वेधशाला, चिंतामन रोड, जबसिंहपुरा, उज्जैन

समय: सुबह 10:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक, प्रतिदिन

इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए-आयशा खान 

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