बाघ गुफाएं जिन्हे मध्य प्रदेश की ‘अजंता’ कहा जाता है, इंदौर से 150 किलोमीटर की दूरी पर बघानी नदी के तट पर स्थित है। मानव  निर्मित गुफाओं की परिणति, बाग गुफाएं 5वीं शताब्दी की भारतीय रॉक-कट वास्तुकला का एक सर्वश्रेष्ठ नमूना हैं। विंध्य के दक्षिणी ढलान के साथ, नौ रॉक-कट गुफाओं का यह समूह प्राचीन भारत के विशेषज्ञ चित्रकारों द्वारा मुरल चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। वर्ष 1953 में भारत सरकार द्वारा वाघ गुफाओं को ‘राष्ट्रीय स्मारक’ घोषित किया गया।

मान्यता के अनुसार यह गुफाएं सातवाहनों द्वारा चौथी-छठी शताब्दी ईस्वी में खोदी गयीं थीं जिसका अर्थ यह है की भारत में बौद्ध काल के अंत के दौरान गुफाएं अस्तित्व में आईं। शुरुआत में यह बौद्ध भिक्षुओं का घर था और मूल 9 गुफाओं में से केवल 5 ही समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं। उनमें से प्रत्येक विहार है, जहां बौद्ध भिक्षु अभी भी विश्राम करते हैं। स्मारक के पीछे एक छोटा कक्ष “चैत्य” बनाता है जिसका अर्थ है “प्रार्थना कक्ष”। इन रॉक कट मठों की दीवारों और छतों को पेंटिंग से सजाया गया है। इन गुफाओं का स्पर्श अजंता की गुफाओं से मिलता-जुलता है। बौद्धों के लिए उनका बहुत धार्मिक महत्व है और समृद्ध भारतीय इतिहास को दर्शाता है।

वास्तुकला की शैली के आधार पर, इन गुफाओं को 7वीं शताब्दी का बताया जाता है। हालाँकि, गुफाओं में से एक के अंदर एक ताम्रपत्र शिलालेख, 4 या 5वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व के समय का संकेत देता है।

मध्य प्रदेश के ‘अजंता’

हालांकि बाग की गुफाएं और अजंता की गुफाएं 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, लेकिन उनकी टोपोग्राफी बहुत अलग नहीं है। इन गुफाओं के चित्रों को अजंता के चित्रों के समकालीन कहा जाता है। ये कलाकृतियां ज्वलंत कल्पना और कलात्मक उत्कृष्ता को दर्शाती हैं, जो अजंता पेंटिंग्स से काफी मिलती-जुलती हैं। कला के लुभावने चित्रण के कारण ये गुफाएं मध्य प्रदेश के पर्यटन आकर्षण के केंद्र के रूप में स्थापित हैं।

रंग महल के रंगों का अन्वेषण करें

पांच जीवित गुफाओं में से दूसरी गुफा पांडवों की गुफा/गोंसाई गुफा के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह समूह के बीच सबसे अच्छी तरह से संरक्षित और सबसे सजावटी है। गुफा का उद्देश्य मूल रूप से आवासीय था। गुफामें एक  3.25 मीटर ऊंची केंद्रीय बुद्ध की आकृति जो कमल के आसन के ऊपर स्थापित है जिसमें दो बोधिसत्व शामिल हैं।

चौथी गुफा जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता है, इस जगह को सचमुच रंग देती है। गुफाओं की छतों पर विशेषज्ञ शिल्पकार द्वारा किए गए प्राचीन भित्तिचित्रों के निशान के अलावा, आश्चर्यजनक ‘पद्मापानी’ – बोधिसत्व की पेंटिंग, जिसे अजंता की चित्रों एक का एक प्रोटोटाइप माना जाता है। 1982 में, स्थायी क्षति को रोकने के लिए गुफा 4 से लगभग 21 नमूनों को हटा दिया गया था।

बाग गुफाएं, भारत की कम खोजी गई विरासत स्थलों में से एक हैं और उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित किया जाता है।

आप कैसे पहुंच सकते हैं

इस स्थान तक आसानी से पहुंचने के लिए, इंदौर शहर से कैब बुक की जा सकती हैं। यह मुख्य शहर से 3 घंटे की ड्राइव होगी और निश्चित रूप से, यह याद रखने योग्य एक सड़क यात्रा होगी! इसलिए अपने कैमरे को साथ ले जाना ना भूलें और सुरक्षित यात्रा के लिए कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें।

समय: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक (सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर)

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