महू (Mhow) भारत में सबसे पुरानी मिलिट्री छावनी के रूप में जाना जाता है। महू (Mhow) की स्थापना सर जॉन मैल्कम ने 1818 में तत्कालीन होल्कर राजा और ब्रिटिश सरकार के बीच मंदसौर की संधि (Treaty of Mandsaur) पर हस्ताक्षर के बाद की थी। इस छावनी का इतिहास स्वतंत्रता के पहले युद्ध (1857) से पहले का है। इसके अलावा, डॉ बी आर अम्बेडकर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ अपने संबंधों के कारण इस जगह की प्रमुखता कई गुना बढ़ गई है। इसलिए हमारे साथ एक वर्चुअल यात्रा शुरू करें, क्योंकि हम आज महू की कहानियों लेकर आये हैं।

कोलोनियल काल से एक सैन्य जगह

1857 के विद्रोह की लपटें 1 जुलाई को जब महूँ पहुंचीं, तो महू किले के भीतर तैनात चौकी ने सफलतापूर्वक 30 दिनों तक हमले को रोके रखा। युद्ध के बाद, अंग्रेजों ने अपनी छवि का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया और महूँ मध्य प्रांत का मुख्यालय बन गया।

द्वितीय विश्व युद्ध के आसपास के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, 1941 में उत्तरी अफ्रीका और इरिट्रिया में इटैलियन और जर्मन सैनिकों को बंदी बनाए रखने के लिए दो युद्ध बंदी शिविरों की स्थापना की गई थी। जनरल ऑर्डे विंगेट की कमान को महूँ के पडोसी क्षेत्र में ट्रेन किया गया था क्योंकि यह बर्मा के इलाके के समान था।

यह छावनी, जो अब एक पूर्ण बस्ती के रूप में विकसित हो चुकी है, 1947 से भारतीय सेना ने अपने कब्जे में ले ली है। सैन्य कर्मियों के शैक्षिक प्रशिक्षण के लिए यहां एक कॉलेज ऑफ कॉम्बैट, इन्फैंट्री स्कूल और टेलीकम्युनिकशन इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की गई है,गोल्फ कोर्स और ऑफिसर्स मेस के अलावा। 

प्रमुख व्यक्तित्व

महू छावनी, लगभग 200 साल के लंबे इतिहास का गवाह है और इस अवधि के दौरान, विंस्टन चर्चिल- ब्रिटेन के युद्धकालीन प्रधान मंत्री, यहां एक सबल्टर्न (सेना में कनिष्ठ अधिकारी) के रूप में तैनात थे। इसके अलावा, भारतीय संविधान के पिता- डॉ बी आर अंबेडकर का जन्म यहां हुआ था, जबकि उनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना में एक जूनियर कमीशंड अधिकारी थे, यहां तैनात थे। उनकी स्मृति में महू का नाम बदलकर डॉ अम्बेडकर नगर कर दिया गया है।

नॉक नॉक 

मालवा प्लैट्यू और चंबल और नर्मदा नदियों के वाटरशेड नदी घाटियों के बीच स्थित, महू में कई कहानियां हैं जो आगंतुकों की कल्पना को मोहित कर सकती हैं। इन कहानियों में स्वर्ग मंदिर और अठारहवीं शताब्दी की बावड़ी सहित आसपास के अन्य पर्यटन स्थल भी शामिल हैं। हम आशा करते हैं कि आपको महू का यह ऐतिहासिक दौरा इस स्थान पर व्यक्तिगत रूप से यहाँ आने के लिए प्रेरित कर पाया होगा।

स्थान: महू छावनी, इंदौर जिला

इनपुट-https://www.knocksense.com/u/sugandhaapandey

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