बोलने या सुनने में अक्षम नागरिकों की सहायता के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग के पुलिस अधिकारियों को साइन लैंग्वेज की मूल बातों के बारे में ट्रेनिंग दी जा रही है। इंदौर जोन आईजी के निर्देश पर शुरू की गई, देश में अपनी तरह की पहली योजना इसे और अधिक समावेशी बनाकर कानून प्रवर्तन प्रणाली को मजबूत करने में मदद करेगी। कथित तौर पर, पुलिस अधिकारियों को हाथ के संकेतों, हावभाव, चेहरे के भाव और शरीर की भाषा को समझने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

विकलांगों के लिए न्याय के महत्व को उजागर करने के लिए एक कदम

रिपोर्ट् के मुताबिक, ट्रेनिंग प्रोग्राम का संचालन साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट ज्ञानेंद्र पुरोहित और मोनिका पुरोहित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत पुलिस अधिकारियों को भाषण और सुनने की समस्याओं वाले लोगों को न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता और महत्व से अवगत कराया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधिकारियों को एक केंद्रित प्रस्तुति के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों की शिकायतों को दर्ज करने के लिए एक विशेषज्ञ की आवश्यकता के बारे में सूचित किया गया था।

एमपी के प्रत्येक शहर में विकलांगों के लिए विशेष केंद्र की स्थापना की जाएगी

रिपोर्ट के मुताबिक, आईजी ने हर थाने के कुछ अधिकारियों को सांकेतिक भाषा सीखने को कहा। उन्होंने मध्य प्रदेश के पुलिस अधीक्षक को हर थाने में एक विशेष बूथ स्थापित करने के भी निर्देश दिए, ताकि बोलने और सुनने में अक्षम नागरिकों को लाभ मिल सकें। अभी तक इंदौर के तुकोगंज थाने में एक ऐसा केंद्र है और रिपोर्ट के अनुसार खंडवा, खरगोन, धार, झाबुआ और इंदौर संभाग के अन्य क्षेत्रों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

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