ब्लैक फंगस संक्रमण का प्रकोप देश भर में फैलने के साथ केंद्र और राज्य प्रशासन इस घातक बीमारी से लोगों की सुरक्षा करने के लिए मेडिकल संसाधनों को बढ़ाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। हाल ही में, इंदौर में आधुनिक प्रयोगशाला को म्यूकोर्मिकोसिस संक्रमण के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली एम्फोटेरिसिन-बी (Amphotericin-B) नामक एंटी फंगस दवा का उत्पादन करने के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने पुष्टि की है कि वह हर दिन लगभग 10,000 शीशियों का निर्माण कर सकती है।

कच्चे माल की खरीद के लिए दिया गया आदेश

देश भर में सबसे अधिक ब्लैक फंगस के मामलों वाले राज्यों में से एक होने के साथ, मध्य प्रदेश में इस बीमारी से लोगों का इलाज करने के लिए एंटी फंगल दवाओं की लगातार कमी रही है। इसी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए,अधिकारी इन दवाओं की सप्लाई को बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहे थे। अब उम्मीद की जा रही है कि इंदौर की कंपनी द्वारा एम्फोटेरिसिन-बी का उत्पादन शुरू करने के बाद यह संकट कम हो जाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने मैन्युफैक्चरिंग के दौरान इस्तेमाल में आने वाले जरूरी रॉ मैटेरियल का ऑर्डर पहले ही दे दिया है। जबकि सप्लाई निश्चित रूप से राज्य के अस्पतालों में बढ़ाई जाएगी, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बड़े पैमाने पर इस दवा के उत्पादन से देश भर में आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है। गौरतालाब है कि संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए, ब्लैक फंगस के रोगियों को एम्फोटेरिसिन बी की तुरंत आवश्यकता होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के सीएम ने एक सप्ताह पहले घोषणा की थी कि राज्य में सभी सरकारी सुविधाओं में ब्लैक फंगस के रोगियों का इलाज मुफ्त में किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया था कि नागरिकों को बीमारी से लड़ने में मदद करने के लिए राज्य भर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसी के तहत नागरिकों को बीमारी से बचाव और लक्षणों का पता लगाने के तरीकों के बारे में बताया जा रहा है। 

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