आईआईएम – इंदौर और मध्य प्रदेश पुलिस मेमोरेंडम यूनियन के तहत पुलिस कांस्टेबलों के लिए विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह नियम पुलिस की जरूरतों के अनुसार बनाया जाएगा और उन्हें स्वयं प्रबंधन जैसे तनाव और समय-प्रबंधन जैसे आवश्यक कौशल से सम्बंधित ट्रेनिंग दी जायेगी। यह कार्यक्रम कर्मियों को जटिल परिस्थितियों में अपने कौशल का इस्तेमाल करते हुए उनसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। यह कदम राज्य में समग्र कानून और व्यवस्था के ढांचे को मजबूत करेगा।

आईआईएम विशेषज्ञता के साथ एमपी पुलिस के कार्यभार में सुधार किया जाएगा

आईआईएम्, इंदौर और मध्य पुलिस विभाग ने जनवरी 2020 में आईआईएम् विशेषज्ञता को पुलिस ढांचे में लागू करने के लिए एक समझौता किया। इस प्रकार, सहयोग की छत्रछाया में यहां कानून-प्रवर्तन प्रकोष्ठ के लिए विभिन्न अध्ययन, कार्यक्रम और ट्रेनिंग कैंप लगाए गए हैं। चूंकि पुलिस के सामने चुनौतियां केवल कोरोना के प्रकोप और जनता को नियंत्रण में रखने की आवश्यकता के साथ बढ़ी हैं, इसलिए कस्टम प्रशिक्षण कार्यक्रम यहां व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक काफी लाभदायक साबित होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, सिस्टम की जरूरतों, कमियों की पहचान करने के लिए आईआईएम इंदौर प्रशिक्षण कार्यक्रम से पहले एक आकलन करेगा। इसके लिए करीब 10,000 कांस्टेबलों का सर्वेक्षण किया जाएगा और इससे मिली जानकारी का इस्तेमाल पुलिस के लिए समाधान निकालने में किया जाएगा। एक ऑनलाइन परीक्षा भी आयोजित की जाएगी और योग्य उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम से राज्य पुलिस विभाग के लगभग 75,000 पुलिस अधिकारियों को लाभ होने का अनुमान है।

आईआईएम के डायरेक्टर  प्रोफेसर हिमांशु राय, जो यहां बीट पुलिसिंग के संबंध में एक अध्ययन का नेतृत्व कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि उनकी खोज पुलिस कर्मियों पर अत्यधिक मानसिक तनाव का संकेत देती है। उनके काम की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, प्रभावी संचालन को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा विधियों और प्रणालियों का निर्माण करना आवश्यक है। 

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