मध्य प्रदेश पुलिस के साथ आईआईएम इंदौर की संधि के तहत यह विशिष्ट संस्थान, इंदौर में बीट पुलिसिंग की व्यवस्था में सुधार के लिए छह महीने का शोध करने जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अनुसंधान परियोजना का नेतृत्व आईआईएम के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु राय करेंगे, जो मौजूदा व्यवस्था का विश्लेषण करने के साथ इसे बेहतर बनाने के लिए उपाय भी बताएंगे। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई पुलिस की बर्बरता, नागरिकों के प्रति क्रूरता के मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।

बीट पुलिसिंग विकसित करना है आवश्यक

आईआईएम इंदौर और एमपी पुलिस मिलकर ‘एक पारस्परिक शैक्षणिक-व्यवसायी सहयोग प्रणाली’ (a mutual academic-practitioner collaboration system) के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर व्यवस्था और एक सुरक्षित वातावरण देने का प्रयास कर रही है। इस मार्ग पर पहला कदम बीट पुलिसिंग प्रणाली को ठीक करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसी प्रथाएं वास्तविकता में समाप्त हो जाएं और लोगों को इससे निजात मिले।

जबकि सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रमों के दौरान आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर एक उचित बीट पुलिसिंग प्रणाली की आवश्यकता को पहचाना गया था, भारत में कई राज्यों में इसे सही ढंग से लागू नहीं किया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से पुलिस बलों के बीच पेशेवर पुलिसिंग के साथ-साथ सामुदायिक पुलिसिंग दोनों को मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है।

 पुलिस प्रणाली को अनुसंधान के दायरे में लाया जाएगा

आईआईएम इंदौर और एमपी पुलिस के अधिकारी गुरुवार को अध्ययन के विनिर्देशों को अंतिम रूप देने के लिए तैयार हैं। मसौदा प्रस्ताव वर्तमान में आईआईएम को जमीनी मुद्दों की पहचान करने के लिए फील्डवर्क करने के लिए बाध्य करता है। बीट पुलिसिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए आईआईएम को अपराध से संबंधित डेटा प्रदान किया गया है।

आईआईएम निदेशक ने कहा कि टीम इंदौर में बीट पुलिसिंग के मौजूदा ढांचे का सिस्टम-स्तरीय अध्ययन (system-level study) करेगी। प्रभावी पुलिस-सामुदायिक बल के लिए विभिन्न संचार शैली (communication styles), व्यवहार पैर्टन (behavioural patterns), पारस्परिक दक्षता (interpersonal competencies) और अन्य मूल्य भी अनुसंधान के दायरे में होंगे।

इसके अलावा, आईआईएम के प्रोफेसर यह समझने के लिए संरचनाओं का संचालन करेंगे कि बीट कर्मी कैसे रिकॉर्ड बनाए रखते हैं, अपने अधिकार क्षेत्र के तहत क्षेत्र के आसपास गश्त करते हैं और अन्य कर्तव्यों के साथ कमांड सेंटर के साथ समन्वय बनाए रखते हैं।

मप्र पुलिस 6 महीने बाद आईआईएम इंदौर के सुझावों की समीक्षा करेगी

बीट पुलिसिंग इंदौर में कानून प्रवर्तन संरचनाओं का प्राथमिक निर्माण खंड है। एक बेहतर पुलिसिंग प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान इस पारिस्थितिकी तंत्र में समस्यायों की पहचान करने में मदद करेगा। इंदौर के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के एसपी ने बताया कि शोधकर्ताओं को लॉजिस्टिक्स, बेसिक डेटा, क्राइम सीन तक पहुंच और क्राइम डेटा उपलब्ध कराया जाएगा।

6 महीने की अध्ययन अवधि के बाद, IIM पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सुझावों और सिफारिशों की एक सूची तैयार करेगा। जो रिपोर्ट दर्ज की जाएगी, उसकी समीक्षा मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा उचित समाधान के लिए की जाएगी।

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