ब्लैक,वाइट और येलो फंगल संक्रमण ने पूरे देश में कोरोना रोगियों के जीवन को प्रभावित किया है। इसके बाद अब इंदौर में ग्रीन फंगस का एक मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, 30 साल से अधिक उम्र के मरीज को इंदौर के एक निजी चिकित्सा केंद्र से मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में ले जाया गया। इंदौर के स्वास्थ्य विभाग के जिला डाटा मैनेजर ने बताया कि यह संभवत: देश में अपनी तरह का पहला मामला है।

ग्रीन इन्फेक्शन क्या है?

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन फंगस (Aspergillus) के कारण होता है, जो एक सामान्य फंगस है जो बंद और खुली जगहों में पनपता है। जबकि हम आम तौर पर हर दिन इसके फंगस के संपर्क में आते हैं, हमारा इम्युनिटी सिस्टम इन्हे विकसित होने से रोक लेता है। हालांकि, कम इम्युनिटी का लेवल या फेफड़ों से संबंधित समस्याओं वाले लोगों में बीमारी को पकड़ने की संभावना बढ़ जाती है। एक बार जब रोग बढ़ जाता है, तो यह एलर्जी, फेफड़ों की समस्याओं और अन्य अंगों की समस्याओं का कारण बन सकता है।

कथित तौर पर, इस समस्या के सामान्य लक्षणों में कुछ मामलों में घरघराहट, सांस की तकलीफ और बुखार शामिल हैं। इस संक्रमण का पता लगाने के लिए लैब टेस्ट, ब्लड टेस्ट और सीटी स्कैन की आवश्यकता होती है। इस संक्रमण की संभावनाओं को कम करने के लिए, धूल भरी जगहों पर बाहर नहीं निकलना चाहिए, मिट्टी के निकट संपर्क में गतिविधियों में शामिल होने से बचना चाहिए और चोटों के मामले में उचित त्वचा की स्वच्छता बनाए रखना चाहिए।

मरीज़ को मुंबई में सबसे अच्छा इलाज मिलेगा 

 कुछ जटिलताओं के विकसित होने के बाद, घातक ब्लैक फंगस की स्थिति को लेकर मरीज़ का टेस्ट किया गया लेकिन एक नए प्रकार के संक्रमण का पता चला। इसके कारण, डॉक्टर कोरोना के बाद के रोगियों में इस बीमारी की घटना को समझने के लिए गहन रिसर्च में लगे हुए हैं। इसके अलावा, मुंबई के स्वास्थ्य केंद्र में रोगी की स्थिति के आधार पर आवश्यक इलाज दिया जा सकेगा।

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