इंदौर में गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजिकल साइंसेज (SGSITS) के प्रशासन ने ऐसे क्षेत्र में ‘नो व्हीकल जोन’ बनाया है, जहां आमतौर पर ट्रैफिक ज्यादा होता है। यह फैसला यहां गिलहरियों को बचाने के लिए लिया गया है, क्योंकि वे अक्सर गुज़रने वाले वाहनों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। अब, चार पहिया वाहनों पर प्रतिबंध के साथ, छात्रों और परिसर के निवासियों को 800 मीटर के रास्ते पर या तो पैदल चलना होगा या साइकिल चलानी होगी

ड्राइविंग और कार पार्क करने की अनुमति नहीं है

SGSITS के निदेशक ने एएनआई को बताया कि, “कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान गिलहरियों की आबादी काफी बढ़ गई और परिसर में लगभग 1,500 गिलहरियां हैं। परिसर के सामने और बीच में, लगभग 800 मीटर लंबी दो बड़ी सड़कें हैं। लॉकडाउन प्रतिबंध हटने के बाद, हमने सड़क पर गिलहरियों की लाशें देखीं।”

परिसर के निवासियों के बीच इस खतरे के बारे में जागरूकता फैलाने के बावजूद, कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं देखा गया। इसलिए, कैंपस प्रशासन ने ‘नो व्हीकल जोन’ बनाने का फैसला किया। ‘नो व्हीकल ज़ोन’ के भीतर, ड्राइविंग या कार पार्किंग की अनुमति नहीं है, हालांकि, दोपहिया और साइकिल के उपयोग की अनुमति है।

कॉलेज कैंपस में कई पशु निवास करते हैं

कॉलेज के उद्यान प्रभारी के अनुसार गिलहरियां व अन्य जीव परिसर के पारिस्थितिकी तंत्र (ईकोसिस्टम) का अहम हिस्सा हैं। 30 एकड़ के परिसर में, लगभग 6,000 छात्रों और कर्मचारियों के साथ अन्य जानवर, उच्च ऑक्सीजन उत्पादक पौधे, और खरगोश भी निवास करते हैं। इसके अलावा, यहां मधुमक्खियों की कॉलोनी है और तितलियों की आबादी बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।

– एजेंसी द्वारा मिली जानकारी के अनुसार

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