जरूरी बातें

कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय ने ठंडे खून वाले जानवरों को गर्म रखने के लिए कड़े इंतज़ाम किये हैं।
ठंडे खून वाले जानवरों को गर्मी प्रदान करने के लिए हीटिंग पैड और वार्मर की व्यवस्था की गयी है।
चिड़ियाघर में रह रहे तमाम ठंडे खून वाले जानवर ठंडक में प्रसुप्त अवस्था में रहते हैं।
रात में इन जानवरों के पिंजरे को गरम कपड़े से ढक दिया जाता है।
यहां आने वाले पर्यटकों के लिए अनुभव पहले जैसा ही रोचक है।

इंदौर में भीषड़ ठंड के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए शहर के कमला नेहरू प्राणि संग्रहालय ने ठंडे खून वाले जानवरों को गर्म रखने के लिए कड़े इंतज़ाम किये हैं। इंदौर के चिड़ियाघर में रह रहे ठंडे खून वाले जानवरों का शरीर ठंड के मौसम में अपने-आप को, दूसरे जानवरों की तरह गरम नहीं रख पाता है। जिस वजह से इंदौर के चिड़ियाघर में उन्हें गर्मी प्रदान करने के लिए हीटिंग पैड और वार्मर की व्यवस्था की गयी है। इंदौर चिड़ियाघर द्वारा उठाये गये इस कदम से ठंडे खून वाले जानवरों को ठण्डक में राहत मिल सकेगी।

पिंजरों को रात में गरम कपड़े से ढका जाता है

इंदौर के चिड़ियघर में रह रहे ठण्डे खून वाले जानवरों को राहत प्रदान करने वाले इस कदम पर बात करते हुए चिडयाघर के इंचार्ज ने बताया कि, ” चिड़ियाघर में रह रहे तमाम ठन्डे खून वाले जानवर ठंडक में प्रसुप्त अवस्था में रहते हैं। जिस वजह से हमें इनकी देखभाल करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।” उन्होंने यह भी बताया की इन जानवरों को पैड और वार्मर देने के साथ ही रात में इनके पिंजरे को गरम कपडे से ढक दिया जाता है।

पर्यटकों के लिए अनुभव पहले जैसा ही है रोचक

चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा उठाये गए इन स्वास्थ्य उपायों के कारण सभी जानवरों के लिए मौसम के अनुकूल परिस्थितियों को बनाने काफी मदद मिली है। जिस वजह से यहां आने वाले पर्यटकों के लिए अनुभव पहले जैसा ही रोचक है। इसी सम्बन्ध में अहमदाबाद की एक पर्यटक नम्रता ने कहा कि, इंदौर चिड़ियाघर को खूबसूरती से पुनर्निर्मित किया गया है। यहां साफ़- सफाई का अच्छे से ध्यान रखा जाता है जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाता है। हम यहां जब घूमने आये तो हमने जानवरों के पास हीटर रखे देखे जिससे उन्हें ठण्डक में आराम मिल पा रहा था।

वहीँ यहां घूमने आयीं एक और पर्यटक मंजरी अग्रवाल ने कहा कि, “यह चिड़ियाघर अच्छी तरह से बनाया गया है। यहां सांपों को हीटर उपलब्ध कराये गए हैं। और दूसरे जानवरों को ठंड से बचाने के लिए ऊनी कपड़े भी दिये गये हैं।”

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