बायोडायवर्सिटी शब्द का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। लेकिन क्या हम वास्तव में जानते हैं कि बायोडाइवर्सिटी में क्या शामिल है ? सभी जीवन के रूप जिन्हें हम अपनी आंखों से देखते हैं, या नहीं भी देख सकते हैं, वे सब मिलकर पृथ्वी पर विविधता का निर्माण करते हैं। यदि हम सिर्फ पौधों और जानवरों को जैव विविधता के हिस्से के रूप में पहचानते हैं तो इसका अर्थ है की बायोडायवर्सिटी की हमारी समझ सीमित है।

हमारे पर्यायवरण को आकार देने वाले असंख्य जैविक संसाधनों की रक्षा के बारे में सभी लोगों की जारूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (International Day for Biological Diversity) मनाया जाता है। इस दिन का महत्त्व विश्वस्तर पर होने के साथ हमारे भारत में भी अत्यधिक है क्यूंकि हमारा देश विश्व के अत्यधिक विविध देशों में से एक है।

इस साल हालांकि जब पूरा विश्व कोरोना महामारी के दुष्प्रभावों से ग्रसित है, तो यह दिन एक ऑनलाइन अभियान के साथ मनाया जाएगा, जो इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है की हम सभी एक दुसरे के लिए और सम्पूर्ण ग्रह के लिए सकारात्मक बदलाव के स्त्रोत बन सकते हैं।

हम समस्या हैं या समाधान ?

कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (Convention on Biological Diversity) के अधिकारियों ने 2021 के नारे की घोषणा की है, "हम समाधान का हिस्सा हैं" (We're part of the solution) यह नारा पिछले वर्ष के जैव विविधता दिवस के नारे "हमारे समाधान प्रकृति में हैं" (Our solutions are in nature) को आगे बढ़ाते हुए दिया गया है।

आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बायोडायवर्सिटी दिवस नए ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क पर केंद्रित है जिसे आगे आने वाली यूनाइटेड नेशंस बायोडायवर्सिटी कांफ्रेंस (COP15) में अपनाया जाएगा। यह अभियान एक प्रकर्ति के प्रति हमारी ज़िम्मेदारियों को समझने और उन्हें पूरा करने के लिए कदम बढ़ाने की बात कहेगा। 2021 में समग्र बायोडायवर्सिटी कम्युनिकेशन कार्यों के लिए हैशटैग #ForNature है।"

18 में से तीन भारत के बायोस्फीयर मध्य प्रदेश में हैं


भारत विश्व के 34 बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट में से 4 का घर है, और यहां 18 नामित बायोस्फीयर रिजर्व हैं। इनमें से 3 मध्य प्रदेश क्षेत्र में स्थित हैं, जो डायनासोर के जीवाश्मों के लिए भी प्रसिद्ध है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है की भारत की विशाल विविधता का श्रेय इस तथ्य को जाता है कि यह गोंडवाना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। सीबीडी के अनुसार, इसकी "विभिन्न एडैफिक, जलवायु और टोपोग्राफिक स्थितियों और वर्षों की जियोलाजिकल स्थिरता के परिणाम के रूप में ही यहां जंगलों, घास के मैदानों, वेटलैंड, रेगिस्तान और तटीय और समुद्री इलाकों जैसे इकोसिस्टम और आवासों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।"

Knock Knock

2021 के नारे से पता चलता है कि मनुष्यों ने अस्तित्व के अलग-अलग क्षेत्र बनाए हुए हैं। एंथ्रोपोसेंट्रिज्म (Anthropocentrism) ने इस विश्वास को शक्ति प्रदान की है कि यहां प्रकर्ति और मनुष्य एक दुसरे के पूरक होने के बजाये एक दुसरे के विरुद्ध हैं और मनुष्य ही सर्वोपरि हैं। इसके परिणामस्वरूप संधारणीय विकास (Sustainable development) से संबंधित प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं। यदि मनुष्य प्रकृति के साथ मिलकर रहें तो वे समस्या के बजाय समाधान का हिस्सा बन सकते हैं।

व्यक्तिगत स्तर पर भी हम समाधान का हिस्सा बन सकते हैं। बायोडायवर्सिटी के बारे में अधिक पढ़कर, इसके बारे में जागरूकता फैलाकर, अधिक पेड़ लगाकर, फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए अपने खाने में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करके, भोजन और पानी को बर्बाद न करके, कम वेस्ट पैदा करके और उत्पादों को फिर से इस्तेमाल और रीसायकल करके हम अपना योगदान दे सकते हैं।

आइए हम हर साल केवल एक दिवस के रूप में मनाने के बजाय अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (International Day for Biological Diversity) को एक नियमित अपने जीवन का दैनिक हिस्सा बनाएं ।