आईआईएम इंदौर (IIM Indore) ने पर्यायवरण के हित में एक विशेष पहल शुरू की है। इंदौर के प्रतिष्ठित संस्थान ने अपनी बिजली की खपत को कम करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable energy) के नए स्रोतों की ओर अपने प्रयास केंद्रित किये हैं। नवंबर 2020 से मार्च 2021 तक, आईआईएम इंदौर (IIM Indore) ने अपने पुराने ऑडिटोरियम, प्रशासनिक ब्लॉक, पांच छात्रावासों, मेस और शैक्षणिक ब्लॉक के रूफटॉप पर सोलर पैनल स्थापित किए हैं। इस प्रावधान की मदद से पिछले 6 महीनों में औसतन 11.8% बिजली को सफलतापूर्वक बचाया गया है। इस सतत विकास से संस्थान ने अपने सामाजिक रूप से जागरूक और पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण को और आगे बढ़ाया है।

आईआईएम इंदौर का जल्द ही नेट-जीरो एनर्जी कैंपस बनने का लक्ष्य पूरा होगा


लगभग 4600 वर्ग मीटर रूफटॉप सोलर पैनल की मदद से आईआईएम इंदौर पर्याप्त एनर्जी उत्पन्न करके बिजली की खपत को प्रभावी ढंग से कम कर रहा है। 193 एकड़ के परिसर में विभिन्न इमारतों में अब ये वैकल्पिक बिजली जनरेटर हैं, जो भविष्य में संस्थान की नेट ज़ीरो एनर्जी वाले कैंपस बनने की महत्वाकांक्षा को बढ़ावा दे रहे है। इसका मतलब है कि यहां साल भर में उपयोग की जाने वाली बिजली की कुल मात्रा,इस समय परिसर में वैकल्पिक साधनों से उत्पन्न एनर्जी की मात्रा के बराबर है।

आईआईएम के डायरेक्टर, प्रोफेसर हिमांशु राय ने आधुनिक दुनिया में प्रासंगिक बने रहने के लिए ग्रीन,सुरक्षित और स्वच्छ तरीकों को बनाए रखने के संस्थान के दृष्टिकोण को साझा किया है। इंदौर को स्वच्छ शहर की पहचान बताते हुए, आईआईएम एक प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र है जहां सभी कर्मचारी अपने कार्यालयों में तांबे की बोतलों का उपयोग करते हैं। संस्थान परिसर में खाद के निर्माण के लिए नो-किचन नीति घरेलू कचरे का उपयोग किया जाता है। सभी कचरे को हर ब्लॉक में रखे आर्गेनिक और नॉन -आर्गेनिक डिब्बे में अलग किया जाता है, जिससे परिसर काफी साफ सुथरा रहता है।

आईआईएम इंदौर में बिजली बचाने के अन्य प्रावधान


बिजली और बायोफ्यूल के अलावा, आईआईएम इंदौर में रेनवाटर हार्वेस्टिंग के प्रावधान भी हैं जो बागवानी और सफाई के लिए संसाधनों की सप्लाई करते हैं। पिछले साल ही पानी की खपत को बचाने के लिए पानी के नल लगाए गए थे। जबकि परियोजना को दो छात्र मेस तक सीमित कर दिया गया है, अभी के लिए, संस्थान का लक्ष्य हर नल में टोंटी स्थापित करना है। एक बार पूरी तरह से व्यवस्थित होने के बाद, यह एक दिन में 2-2.5 लाख लीटर पानी की बचत में मदद करेगा, जो इसकी वर्तमान दैनिक खपत का लगभग आधा है।

आईआईएम इंदौर में एक समर्पित हॉर्टिकल्चर सेल संजीवनी भी है, जो की एक प्रभावी वैकल्पिक मेडिकल सहायता है। विभाग जड़ी-बूटियों और दवाओं का उत्पादन करता है जो मरीजों को पास के अस्पतालों से प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, आईआईएम के नए बनाये गए ज़ेन गार्डन और स्पिरिचुअल गार्डन में पंचतत्व ट्रैक है और कई औषधीय और सुगंधित जड़ी-बूटियां भी उगाई जाती हैं। इन सुविधाओं के ज़रिये केमिकल निर्मित दवाओं पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है।