मध्य प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जिन्हें प्राकृतिक खूबसूरती का वरदान मिला है। इंदौर से 221 किमी की दूरी पर राजगढ़ जिले में स्थित नरसिंहगढ़ सेंचुरी ऐसी ही एक जगह है, जिसे कुदरत ने बेमिसाल खूबसूरती से नवाज़ा है। इस अभयारण्य में पौधों और पशुओं की विभिन्न प्रजातियों निवास करती हैं, जो सभी प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। प्रकृति की गोद में बसी यह जगह न केवल उन लोगों के लिए खास है जो शहर की भाग-दौड़ से दूर शांति की खोज में हैं, बल्कि उन लोगों को बेहद पसंद आती है जो रोमांच की तलाश में यहां आते हैं।

चिड़ीखो तलाब है यहां का मुख्य आकर्षण


इस सेंचुरी में चिड़िया के आकार का एक तलाब मौजूद है, जिसे 'चिड़िखो तलाब' के नाम से जाना जाता है। चारों ओर पहाड़ियों, वृक्षों, बेलाओं और शाक के घिरी यह प्राकृतिक झील, यहां का मुख्‍य आकर्षण केन्‍द्र है। इस तालाब को न‍रसिंहगढ़ के महाराजा श्री विक्रमसिंह द्वारा सन् 1935 में बनवाया गया था। इन पहाड़ियों में विभिन्‍न प्रकार के वन्‍यप्राणी निवास करते हैं।

गर्मी में यह एकमात्र बड़ा जल स्‍त्रोत है तथा तालाब कभी भी नहीं सूखता है इसी कारण यहां लगभग तीन किलोमीटर के आसपास के जंगली जानवर रोज सुबह व शाम के समय पानी पीने आते हैं, यहां अकसर पशुओं को तालाब के किनारे विचरण करते देखे जा सकते है।

इस क्षेत्र को 1956 में मध्य भारत सरकार द्वारा (मध्य प्रदेश को पहले मध्य भारत के नाम से जाना जाता था) ने इसे संरक्षित वन घोषित किया, इसके बाद यहां 1971 में शिकार पर प्रतिबंध लगाया गया, और आखिरकार 1974 में इसे अभयारण्य घोषित किया गया।

नरसिंहगढ़ सेंचुरी की अन्य विशिष्टताएं


नरसिंहगढ़ किला- अभयारण्य के परिसर में प्रकृति के खूबसूरत दृश्यों के अतिरिक्त कई नरसिंहगढ़ किसे जैसी भव्य इमारतें भी मौजूद हैं। साथ ही इस जगह पर बड़ा महादेव, छोटा महादेव मंदिर, हज वाली दरगाह जैसी स्थल भी हैं, जो कई लोगों के लिए आस्था का केंद्र हैं। त्योहारों पर इन जगहों की रौनक देखने लायक होती है।

पक्षी दर्शन :- यहां आपको मध्य प्रदेश का राज्यपक्षी दूधराज उड़ते हुए दिख सकते हैं। लगभग 175 पक्षियों की प्रजातियों के साथ यह जगह सभी पक्षी प्रेमियों के लिए भी खास है। यहां रोड़ स्‍पफाउल, प्‍लमहैडेड पैराकीट, हरियल आदि जैसे विशेष पक्षियों की प्रजातियां भी यहां पाई जा सकती हैं। ठंड में अभयारण्‍य में स्थित जलाशयों में विभिन्‍न प्रवासी पक्षी प्रजातियां जैसे ब्राह्मणी डक, पिनटेल, कॉन टील, कॉब डक आदि अठखेलियां करते देखे जा सकते है।

नेचर ट्रेल :- इस सेंचुरी में लगभग 30 प्रकार के वन्‍य पशु एवं 190 प्रकार की वनस्‍पतियां पाई जाती है। यहां बनी ट्रेल में भ्रमण करते समय सांभर, चीतल, जंगली सुअर, सियार इत्‍यादि जीव दिखाई देते हैं। वहां तेन्‍दुए के पदचिन्‍हों के निशान भी देखने को मिलते है। विभिन्‍न मौसमों में फलने-फूलने वाली वनस्‍पति प्रजातियां जैसे पलाश, खैर, महुआ, साज, अमलतास इत्‍यादि भी यहां पाई जाती है। तीन अलग-अलग पेड़ो की एक दूसरे से जुड़ी डाले पर्यटकों को आश्‍चर्य में डाल देती है।

जंगल सफारी :- अभयारण्‍य में भ्रमण हेतु अपने वाहन से जंगल सफारी पर जाने की सुविधा भी उपलब्ध है। बशर्ते कार 5 वर्ष से अधिक पुरानी न हो। यह मानदंड अभयारण्य की सीमा के भीतर गैस उत्सर्जन के स्तर को कम करने के लिए स्थापित किया गया है। जंगल सफारी द्वारा संपूर्ण अभयारण्‍य में पाये जाने वाले वन्‍यजीवों एवं पक्षियों को देखने का आनंद उठाया जा सकता है।

नौका भ्रमण :- चिड़ीखो तलाब में पैडल बोड द्वारा सूर्योदय व सूर्यास्‍त के मनोरम दृश्‍य का आनंद लिया जा सकता है, तथा प्रवासी पक्षियों को भी निहारा जा सकता है।

नॉक-नॉक


इस जगह की अद्भुत खूबसूरती के कारण इसे 'मालवा के कश्मीर' नाम से भी जाना जाता है। अगर आप भी धरती पर बसी इस परी-कथाओं जैसी मनोरम जगह के दृश्यों को अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहते हैं, तो जल्द से जल्द यहां जाने की योजना बनाएं। आपको बता दें कि सर्दियों का मौसम यहां जाने के लिए सबसे उचित है। इसके अलावा आप यहां मार्च से जून के बीच में कभी भी जा सकते हैं।