देश में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच, एक नए वैरिएंट ने दस्तक दी है। ओमिक्रॉन के इस नए वैरिएंट को BA-2 नाम दिया गया है, जिससे इंदौर में 16 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इन संक्रमितों में 6 बच्चे भी शामिल हैं और 3 वयस्क पूर्ण टीकाकरण के बावजूद इस स्ट्रेन की चपेट में आ गए हैं।

फेफड़ों में इंफेक्शन बन सकता है चिंता का कारण

UK, ऑस्ट्रेलिया और डेनमार्क में भी इसके केस सामने आए हैं। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन की तरह ही तेजी से फैलता है। ऐसे में इसकी पहचान न होने पर इसके संक्रमण को रोक पाना बड़ी चुनौती है। चिंता की बात यह है कि टेस्ट किट की पकड़ में भी नहीं आ रहा है। इसी वजह से इसे ‘स्टेल्थ’ यानी छिपा हुआ वर्जन कहा जा रहा है। ब्रिटेन, स्वीडन और सिंगापुर में से हर एक देश ने 100 से ज्यादा सैम्पल जांच के लिए भेजे हैं।

SAIMS के अध्यक्ष, डॉ वी भंडारी ने बताया कि इस उप-वंशीय स्ट्रेन का फेफड़ों पर प्रभाव, चिंता का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी साझा किया कि जिन लोगों ने एहतियाती शॉट लिया है उनके  फेफड़ों में केवल 1 से 5% तक इंफेक्शन देखने को मिला है। दूसरी ओर, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ संजय दीक्षित ने कहा कि 50% से कम फेफड़ों का इंफेक्शन गंभीर नहीं है। हालांकि, फेफड़ों में इंफेक्शन की जानकारी देने वाले सभी मरीजों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

ओमिक्रॉन जैसे लक्षण पाए गए हैं

रविवार को इंदौर में जहां बीए-1 के केवल तीन मामले पाए गए, वहीं सब-वेरिएंट देश भर में लोगों को काफी संक्रमित कर रहा है। इस नई लहर के फरवरी में चरम पर पहुंचने की उम्मीद है।

 

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