डुबकियां सिंधु में ग़ोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं मोती सहज ही गहरे पानी में
बढ़ता उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

कवि हरिवंश राय बच्चन की इन पंक्तियों की साक्ष्य हैं इस वर्ष 2021 की पद्मश्री विजेयता मंजम्मा जोगती जिन्होंने अपने जीवन में लाख चुनौतियों का सामना करके भी उम्मीद के दामन को नहीं छोड़ा। वे अपने जीवन में कई बार बिखरीं लेकिन हर बार पहले से अधिक मज़बूती से उठ खड़ी हुईं। मंजम्मा ने कला के क्षेत्र में अपने बहुमूल्य योगदान के लिए चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार प्राप्त किया।

कर्नाटक के बल्लारी जिले में ‘मंजुनाथ शेट्टी’ के रूप में जन्मी, वह अपनी असली यौन पहचान को महसूस करने के बाद, 16 साल की उम्र में ‘जोगप्पा’ बन गईं। जोगप्पा ट्रांसजेंडरों का एक प्राचीन समुदाय है जिन्होंने खुद को ‘देवी रेणुका येलम्मा’ की सेवा में समर्पित कर दिया है। हम सभी जानते हैं की हमारा समाज ट्रांसजेंडरों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने में असमर्थ रहा है और इसी बात का नुक्सान मंजम्मा को उठाना पड़ा क्यूंकि उन्हें दो जून की रोटी जुटाने के लिए सड़कों पर भीक मांगनी पड़ती थी उस समय उनका यौन शोषण भी हुआ।

मंजम्मा ट्रांसजेंडरों के जिस समुदाय से हैं वहां दीक्षा समारोह के दौरान एक जोगप्पा को देवी से विवाहित माना जाता है और उन्हें अपने परिवारों के घर लौटने की अनुमति नहीं होती है। मंजम्मा भी अपने समुदाय से जुड़कर निष्ठां और विश्वास के साथ अपने जीवन को एक नयी दिशा देने के प्रयासों में लग गयीं। उन्होंने जोगप्पा समुदाय द्वारा किया जाने वाला एक अनुष्ठान लोक नृत्य जोगती नृत्य में अपनी असली पहचान पाई।

मंजम्मा कला के जोगती नृत्य समूह में एक स्थायी नर्तकी बन गईं और उन्होंने 1,000 से अधिक स्टेज पर परफॉर्म किया। अपने गुरु, ‘कालव्वा’ की मृत्यु के बाद उन्होंने मंडली को संभाला और नृत्य को लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया। 2010 में, मंजम्मा को कर्नाटक सरकार से राज्योत्सव पुरस्कार मिला। 2019 में, उन्हें कर्नाटक जनपद अकादमी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, और इस पद तक पहुँचने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति बनीं।

मंजम्मा का जीवन हमे इस बात का सन्देश देता है की यदि हमारे परिवार में ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं तो कृपया उन्हें न छोड़ें, बल्कि उन्हें शिक्षित करें। यह एक स्वतंत्र देश है और आप स्वतंत्र रूप से रह सकते हैं। ट्रांसजेंडर शिक्षित होंगे तो वे भी आगे बढ़ सकते हैं। शिक्षा उन्हें समझदार बनाएगी और वे सेक्स वर्क या भीख मांगने का सहारा नहीं लेंगे। सम्मान ग्रहण करते समय मंजम्मा जोगती ने अपने अनोखे अंदाज में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अभिवादन किया था. उनके अनूठे अंदाज को देख दरबार हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था।

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