नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने रुपे कार्ड के लिए टोकनाइज़ेशन सिस्टम चालू कर दिया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया टोकनाइज़ेशन सिस्टम पर दुकानदार कार्ड का ब्योरा स्टोर कर सकेंगे। इससे ग्राहकों के कार्ड की सुरक्षा बढ़ेगी। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कहा कि टोकनाइज़ेशन के जरिये लेनदेन सुरक्षित हो इसके लिए ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी को आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार एन्क्रिप्टेड ‘टोकन’ के रूप में रखा जाएगा। इन टोकनों के जरिये ग्राहकों की जानकारी का खुलासा हुए बिना भुगतान किया जा सकेगा।

NPCI के उत्पादक प्रमुख कुणाल कलावतिया ने कहा कि कार्ड टोकन को लेकर आरबीआई के दिशानिर्देशों से देश में डिजिटल भुगतान के इकोसिस्टम की सुरक्षा बढ़ेगी। हमें उम्मीद है कि NPCI के इस कदम से लाखों रुपे कार्डधारकों में सुरक्षित लेनदेन को लेकर भरोसा पैदा होगा और इससे डिजिटल पेमेंट के सभी विकल्पों को मजबूती मिलेगी।

देश में एटीएम का इस्तेमाल कम हुआ

देश में डिजिटल पेमेंट के विभिन्न विकल्पों की वजह से अब लोगों ने एटीएम का इस्तेमाल करना कम कर दिया है। लोग अब लेनदेन के लिए ज्यादातर मोबाइल बैंकिंग या फिर यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। आरबीआई द्वारा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च 2021 के अंत तक लोगों ने सबसे ज्यादा लेन-देन करीब 65.8 फीसदी लेनदेन मोबाइल बैंकिंग के जरिये की। एटीएम से सिर्फ 15.9 फीसदी ट्रांजेक्शन हुए। वहीं 10.4 फीसदी ट्रांजेक्शन के साथ मोबाइल वॉलेट तीसरे स्थान पर रहा। लेनदेन के तरीकों के मामले में 2014 तक के हालात बिलकुल उलट थे। तब हर 5 में से 4 लेनदेन एटीएम से कैश निकालकर होता था। 2014 में जितना लेनदेन हुआ, उसमें 82.1 फीसदी लेनदेन एटीएम से कैश निकालकर किए गए।

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