मुख्य बिंदु

सानिया मिर्जा ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के पहले दौर के बाद अपनी रिटायरमेंट घोषणा कर दी है।
सानिया ने घोषणा की कि 2022 टूर पर उनका आखिरी सीजन होने जा रहा है।
सानिया मिर्जा 2003 से प्रोफेशनल टूर पर खेल रही हैं।
सानिया को टॉप पर टेनिस खेलते हुए 19 साल हो गए हैं।
सानिया डबल्स में विश्व की पूर्व नंबर 1 खिलाड़ी हैं।
ग्रैंड स्लैम जीतने वाली वे पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।
उन्होंने अपने करियर में 6 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं।

भारत की सबसे प्रतिष्ठित टेनिस (Tennis) खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने बुधवार को ऑस्ट्रेलियन ओपन 2022 (Australian Open 2022 ) में Women’s Doubles के पहले दौर में हारने के बाद अपनी रिटायरमेंट घोषणा कर दी है। मिर्जा और उनकी यूक्रेनी जोड़ीदार नादिया किचेनोक को स्लोवेनियाई टीम तमारा जिदानसेक और काजा जुवान से एक घंटे 37 मिनट में 4-6, 6-7 (5) से हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद, सानिया ने घोषणा की कि 2022 टूर पर उनका आखिरी सीजन होने जा रहा है और वह वास्तव में इसे पूरा करना चाहती हैं। अपनी बात प्रेस में कहते हुए सानिया के बताया, “मैंने तय किया है कि यह मेरा आखिरी सीजन होगा। मैं हफ्ते दर हफ्ते तैयारी कर रही हूं, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि मैं सीजन तक रह पाऊंगी या नहीं, लेकिन मुझे रहना है।” मैं अपने 3 साल के बेटे के साथ इतनी यात्रा करके उसे जोखिम में डाल रही हूं, अब यह मुझे ध्यान में रखना है। मुझे लगता है कि मेरा शरीर थक रहा है।

हैदराबाद से भारतीय टेनिस क्वीन बनने तक का सुनेहरा सफर

बेमिसाल पलों से भरे करियर में, सानिया ने छह साल की उम्र में हैदराबाद में अपने पिता इमरान के संरक्षण में टेनिस खेलना शुरू किया था। मिर्जा ने जूनियर खिलाड़ी के रूप में 10 सिंगल और 13 डबल खिताब जीते। ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक के साथ-साथ डबल्स में मेजर जीता है। उनका आखिरी स्लैम 2016 ऑस्ट्रेलियन ओपन में मार्टिना हिंगिस के साथ आया था और उन्होंने अपने करियर में छह ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं।

सानिया मिर्जा 2003 से प्रोफेशनल टूर पर खेल रही हैं और हैदराबाद की सानिया को टॉप पर टेनिस खेलते हुए 19 साल हो गए हैं। सानिया डबल्स में विश्व की पूर्व नंबर 1 खिलाड़ी हैं और सिंगल्स में उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 27 थी। वह इस समय विश्व में 68वें स्थान पर हैं।

सानिया मिर्ज़ा एक ऐसी अभूतपूर्व खिलाड़ी रही हैं हैं जिन्होंने अपने स्टैण्डर्ड स्वयं सेट किये हैं। उनके पहले, ग्रैंड स्लैम में सिंगल में एक राउंड से अधिक जीतने वाली कोई भारतीय महिला नहीं थी, कोई भी टॉप 100 में नहीं पहुंचा था। किसी ने भी टूर खिताब नहीं जीता था। मिर्जा ने यह सब अपने 20वें जन्मदिन से पहले किया। वे अपने पीछे एक अनुकरणीय अवं अद्वितीय विरासत छोड़ रही है। वे कई मायनों में ट्रेलब्लेज़र हैं जिन्होंने आगे आने वाली पीढ़ियों की भारतीय महिलाओं के लिए अपने खेल के टॉप पर जाने का मार्ग प्रशस्त किया। उनका नाम भारत की अब तक की सबसे महान महिला टेनिस खिलाड़ी के रूप में हमेशा संपूर्ण देश को गौरवान्वित करता रहेगा।

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