मुख्य बातें

WHO ने कहा- साउथ ईस्ट एशिया और अफ्रीका में मिली नकली वैक्सीन।

केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए बाजार में मौजूद नकली कोरोना वैक्सीन की पहचान को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं।

भारत में अब तक 68.46 करोड़ डोज लगाई जा चुकी हैं।

50 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को पहली डोज दी जा चुकी है।

कोरोना महामारी के खिलाफ जंग लड़ने के लिए भारत समेत पूरी दुनिया में युद्धस्तर पर ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन, हाल ही में कई ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं जहां नकली टीके लगाए जा रहें हैं। इंटरनेशनल मार्केट में भी नकली टीकों के कारोबार का खुलासा हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका क्षेत्र में पहचाने जा रहे नकली कोविशील्ड टीके मिलने पर चिंता जताई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि उसे इस साल जुलाई-अगस्त में भारत और युगांडा में नकली कोविशील्ड वैक्सीन मिली हैं। कोविशील्ड बनाने वाले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भी पुष्टि कर दी है कि बाजार में नकली कोविशील्ड वैक्सीन लोगों को दी जा रही है।

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी जारी कर कहा है कि नकली वैक्सीन लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। आम लोगों को नुकसान से बचाने के लिए नकली वैक्सीन की पहचान करना और उसे बाजार से बाहर करना जरूरी है। कोविशील्ड के बैच नंबर 4121Z040 और 10-08-2021 की एक्सपायरी डेट वाली वैक्सीन नकली हैं। नकली कोविशील्ड में कुछ दो एमएल की डोज वाली हैं। सीरम दो एमएल वाले कोविशील्ड वैक्सीन की आपूर्ति नहीं करती। डब्ल्यूएचओ ने सभी हेल्थ सेंटर्स, सप्लायर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स को नकली वैक्सीन से सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि कोरोना वैक्सीन वहीं से ली जाए जिनके पास लाइसेंस हो और जिन्हें वैक्सीन बेचने/बांटने के लिए अधिकृत किया गया हो।

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को लिखा पत्र 

अब केंद्र सरकार ने राज्यों और आम जनता की जागरूकता के लिए कई ऐसे मानक बताए हैं, जिनके आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि आपको जो वैक्सीन लगाई जा रही है वह असली है या नकली। केंद्र सरकार ने इस बारे में सभी राज्यों को पत्र लिखा है और कोवैक्‍सीन (Covaccine), कोविशील्ड (Covishield) और स्पूतनिक-वी (Sputnik V) टीकों से जुड़ी हर जानकारी बताई गई है ताकि यह पता लगाया जा सके की बाजार और अस्पतालों में कहीं नकली टीका तो नहीं है। केंद्र सरकार ने राज्यों को लिखे पत्र में बताया है कि अंतर पहचानने के लिए कोवैक्‍सीन (Covaccine), कोविशील्ड (Covishield) और स्पूतनिक-वी (Sputnik V) तीनों वैक्सीन पर लेबल, कलर, ब्रांड का नाम क्या होता है।

कोविशील्ड (Covishield)

असली कोविशील्ड शीशी की बोतल पर गहरे हरे रंग में एसआईआई उत्पाद का लेबल होगा।

ब्रांड का नाम ट्रेडमार्क के साथ ( कोविशील्ड ) लिखा होगा।

जेनेरिक नाम का शब्द मोटे अक्षरों में नहीं होगा।

इसके ऊपर सीजीएस नाट फॉर सेल ओवरप्रिंट होगा। 

कोवैक्‍सीन (Covaccine)

कोवैक्‍सीन के लेबल पर अदृश्य यूवी हेलिक्स, जिसे सिर्फ यूवी लाइट में ही देखा जा सकता है।

लेबल क्लेम डॉट्स के बीच अक्षरों में छिपा शब्द, जिसमें कोवैक्‍सीन लिखा है।

’X’ का दो रंगो में होना, इसे ग्रीन फॉयल इफेक्ट कहा जाता है। 

 स्पूतनिक-वी (Sputnik V)

स्पूतनिक-वी वैक्सीन रूस के दो अलग प्लांटों से आयात की गई है, इसलिए इन दोनों के लेबल भी कुछ अलग-अलग है।

हालांकि सभी जानकारी और डिज़ाइन एक सा ही है, बस उत्पादनकर्ता का नाम अलग है।

वैक्सीन में सिर्फ 5 एमपूल के पैकेट पर ही अंग्रेजी में लेबल लिखा है। इसके अलावा बाकी पैकेट में यह रूसी में लिखा है। 

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