मुख्य बिंदु 

भूमिगत खदानों में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर हैं और कोल इंडिया में दूसरी महिला माइनिंग इंजीनियर हैं।

हजारीबाग की आकांक्षा ने बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, धनबाद से स्नातक किया है।

उनका पहला कार्यकाल राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक की बलरिया खदानों में था।

आज के दौर में,महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी मेहनत और आत्मविश्वास का ज़माने भर में लोहा मनवा रही हैं। झारखण्ड के हजारीबाग जिले के बरकागांव की निवासी आकांक्षा कुमारी ने इस बात को चरितार्थ किया है, वे कोयला मंत्रालय के तहत सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की पहली महिला खनन इंजीनियर बन गयी हैं। केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आकांक्षा कुमारी को सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के उत्तरी करनपुरा क्षेत्र के चुरी में एक भूमिगत खदान में काम करने वाली पहली महिला माइनिंग इंजीनियर बनने के लिए हार्दिक बधाई दी। आकांक्षा कुमारी की यह उपलब्धि लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलने और हर क्षेत्र में महिलाओं की अधिक भागीदारी का सच्चा उदाहरण है। 

— Central Coalfields Limited (@CCLRanchi) August 31, 2021 “>Also Read:

आकांक्षा कुमारी, एक माइनिंग स्नातक, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड ( Central Coalfields Limited CCL) के उत्तरी करनपुरा क्षेत्र में चुरी भूमिगत खानों में शामिल हो गई है। इस प्रक्रिया में, वह सीसीएल में शामिल होने वाली पहली महिला खनन इंजीनियर बनीं। महिला कर्मचारी अधिकारी से लेकर डॉक्टर से लेकर सुरक्षा गार्ड तक और यहां तक कि डंपर और फावड़ा जैसी भारी मशीन चलाने तक की जिम्मेदारियों को भली भाँती निभा रही हैं और प्रत्येक भूमिका में उत्कृष्ट रही हैं। हालांकि, यह पहली बार है जब दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनियों में से एक की मुख्य खनन गतिविधि इस प्रगतिशील बदलाव की साक्षी बनी है। उनकी उपलब्धि की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आकांक्षा महारत्न समूह कोल इंडिया लिमिटेड में दूसरी खनन इंजीनियर और भूमिगत कोयला खदान में काम करने वाली पहली महिला हैं।

आकांक्षा ने अपनी स्कूली शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी की। एक खनन क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली आकांक्षा ने कोयला खनन गतिविधियों को करीब से देखा और बचपन से ही इसके प्रति आसक्त थी। इस प्रकार, उन्होंने बचपन से ही खनन और इसकी गतिविधियों के प्रति एक स्वाभाविक जिज्ञासा विकसित की, जिसके कारण उन्होंने बीआईटी सिंदरी, धनबाद में खनन इंजीनियरिंग का विकल्प चुना।

कोल इंडिया लिमिटेड में शामिल होने से पहले, उन्होंने राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की बलरिया खानों में तीन साल तक काम किया। वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिए गए अथक समर्थन के लिए अपने परिवार को श्रेय देती हैं। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड में शामिल होना उनके बचपन के सपने को पूरा करना था और उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की उम्मीद है। 

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