जरुरी बातें

भारत में मार्च 2022 तक देश के चार हवाई अड्डों शुरू की जाएगी फेस रिकॉग्निशन प्रणाली
यात्री अपना चेहरा स्कैन कर एयरलाइन या हवाई अड्डे के कर्मचारियों के संपर्क में आए बिना चेक-इन कर सकेंगे।
वाराणसी, पुणे, कोलकाता और विजयवाड़ा हवाई अड्डों पर शुरू होगी ये सुविधा।
यह सिस्टम चेक-इन से लेकर बोर्डिंग तक के कई चरणों को कर देगा कम और आसान। ।

देश के हवाईअड्डों को कॉन्टैक्टलेस बनाने की राह में अगले साल मार्च 2022 तक यात्री देश के 4 हवाई अड्डों पर अपने बोर्डिंग पास के रूप में फेस रिकॉग्निशन प्रणाली (face recognition system) का उपयोग कर सकेंगे। यह सुविधा यात्रियों की सुरक्षित बोर्डिंग प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए शुरू की जाएगी जिसके तहत हवाईअड्डों पर एक बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया जायेगा जिसके द्वारा यात्री अपना चेहरा स्कैन कर एयरलाइन या हवाईअड्डे के कर्मचारियों के संपर्क में आए बिना चेक-इन कर सकेंगे।

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वीके सिंह ने गुरुवार को कहा कि, “भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) वाराणसी, पुणे, कोलकाता और विजयवाड़ा हवाईअड्डों पर यात्रियों के लिए देश की पहली चेहरे की पहचान करने वाली प्रौद्योगिकी आधारित बायोमेट्रिक बोर्डिंग प्रणाली (Technology Based Biometric Boarding System) पर काम कर रहा है।”

डिजी यात्रा सर्विस के तहत शुरू होगा फेस स्कैन सिस्टम

डिजी यात्रा पहल (DigiYatra Services) के तहत कागज़ रहित और परेशानी मुक्त हवाई यात्रा को बढ़ावा मिलेगा। डिजी यात्रा के पहले चरण में देश के चार हवाईअड्डों जो की वाराणसी, पुणे, कोलकाता और विजयवाड़ा होंगे, वहां इस प्रणाली का शुभारंभ किया जायेगा। डिजी यात्रा एक पहल है जिसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) द्वारा शुरू किया गया है।

इसका उद्देश्य यात्रियों की यात्रा को आसान बनाने के लिए प्रौद्योगिकी (technology) का उपयोग करना है। फेशियल बायोमेट्रिक सिस्टम की मदद से, यह चेक-इन से लेकर बोर्डिंग तक के कई चरणों को कम कर देगा जिसमें पहले काफी समय लग जाता था।

इस तरह काम करेगा चेहरे की पहचान करने वाला ये सिस्टम

इस प्रणाली का उपयोग करने के लिए यात्रियों को सबसे पहले डिजियात्रा पर अपना पंजीकरण कराना होगा। एक बार पंजीकरण हो जाने के बाद, यात्रियों को अपना बोर्डिंग पास स्कैन करना होगा और साथ ही चेहरे के बायोमेट्रिक्स (Biometrics) से मिलान करना होगा। सुरक्षा अधिकारी आपके फेशियल डेटा की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि केवल वे यात्री जिन्हें सिस्टम द्वारा मंजूरी दी गई है, सिर्फ वहीं जहाज़ में सवार हों। इस साफ्टवेयर के माध्यम से यात्रियों को प्रत्येक टचपॉइंट पर केवल एक बार गेट पर पंजीकरण करने के बाद सत्यापित किया जाएगा।

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