ज़रूरी बातें

भारत सरकार ने शुक्रवार को वी.अनंत नागेश्वरन को नया चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर नियुक्त किया।
उन्होंने 28 जनवरी 2022 को भारत के नए सीईए के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।
पूर्व इकनोमिक एडवाइजर केवी सुब्रमण्‍यम के बाद वे इस पद को संभालेंगे।
डॉ नागेश्वरन एक लेखक,शिक्षक और सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं।
उन्होंने भारत और सिंगापुर में कई बिजनेस स्कूलों और प्रबंधन संस्थानों में पढ़ाया है।

1 फरवरी को केंद्रीय बजट के तीन दिन पहले, भारत सरकार ने शुक्रवार को वी.अनंत नागेश्वरन को 1 फरवरी को केंद्रीय बजट से तीन दिन पहले नया मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) नियुक्त किया। उन्होंने 28 जनवरी 2022 को भारत के नए सीईए के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

वी.अनंत नागेश्वरन नए सीईए के रूप में कार्यभार संभालेंगे

आमतौर पर आर्थिक सर्वेक्षण के मुख्य वास्तुकार के रूप में प्रतिष्ठित, डॉ नागेश्वरन की इस साल के सर्वेक्षण में ज्यादा भागीदारी नहीं होगी क्योंकि उन्होंने संसद में केंद्रीय बजट पेश होने से कुछ दिन पहले ही यह पद संभाला था।

इस नियुक्ति से पहले, डॉ नागेश्वरन एक लेखक,शिक्षक और सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने भारत और सिंगापुर में कई बिजनेस स्कूलों और प्रबंधन संस्थानों में पढ़ाया है और उन्होंने ‘इकोनॉमिक्स ऑफ डेरिवेटिव्स’, ‘डेरिवेटिव्स’, ‘कैन इंडिया ग्रो?’ और ‘द राइज ऑफ फाइनेंस: कॉज,’ जैसी पुस्तकों का सह-लेखन किया है।”। वह आईएफएमआर ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन और क्रेया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के एक प्रतिष्ठित अतिथि फैकल्टी थे।

एक लेखक, शिक्षक और सलाहकार

2019 से 1021 तक के वर्षों में, वह भारत के प्रधान मंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अंशकालिक सदस्य भी रहे हैं। अकादमिक रूप से, वह भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद से प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा धारक हैं, और एमहर्स्ट में मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की है। नागेश्वरन क्रेडिट सुइस ग्रुप एजी और जूलियस बेयर ग्रुप के साथ एक पूर्व कार्यकारी भी हैं।

नए सीईए के रूप में नागेश्वरन की नियुक्ति के साथ, उन्हें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को महामारी के 2 वर्षों से होने वाले नुकसान से अर्थव्यवस्था को दूर करने में सहायता करने की कल्पना की गई है। हालांकि इस समय भारत के सामने बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है. ऐसे में भारत सरकार पर इससे उबरने का भारी दबाव है. ऐसे समय में नए मुख्‍य आर्थिक सलाहकार से उम्‍मीद की जाएगी कि वे निवेश को पुनर्जीवित करते हुए और बजट अंतर को कम करते हुए उच्‍च विकास के लिए एक नुस्‍खा प्रदान करेंगे. इकनॉमिक सर्वे से पहले देश को नया चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर मिल गया है।

 

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