ज़रूरी बातें 

2030 तक दिल्ली का हवाई अड्डा शुन्य के बराबर कार्बन उत्सर्जन करने वाला एयरपोर्ट बन जायेगा। 

ऑफसेट के माध्यम से रोकी जाएगी कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि। 

रिन्यूएबल एनर्जी को उपयोग में लाया जायेगा। 

एयरपोर्ट पर होगी इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा। 

इलेक्ट्रिक वाहन और टैक्सीबॉट्स को उपयोग में लाया जायेगा।

देश की राजधानी दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 2030  तक ‘नेट जीरो कार्बन एमिशन एयरपोर्ट’ (Net Zero Carbon Emission Airport) यानी शुन्य के बराबर कार्बन उत्सर्जन करने वाला हवाई अड्डा बन जायेगा। 

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सीईओ, विदेह कुमार लोधी नें कहा की,”दिल्ली हवाई अड्डे पर हम एक मज़बूत पर्यावरण बनाने की राह में हैं और ‘एयरपोर्ट कार्बन एक्रेडिटेशन’ (Airport Carbon Accreditation) दिशानिर्देशों का पालन करते हुए हम 2030 तक शुन्य के बराबर कार्बन उत्सर्जन करने में सफल रहेंगे। इसी दिशा में हमने टैक्सीबॉट (TaxiBot) और इलेक्ट्रिक वाहनों को उपयोग में लाना शुरू किया जायेगा जो विभिन्न पर्यावरणीय रूप से स्थायी कार्यक्रम के अंतर्गत आता है।

अगर तकनिकी भाषा में बात करें तो ‘कार्बन न्यूट्रल’ (Carbon-neutral) उस नीति के तहत आता है जहां हम कार्बन उत्सर्जन की वृद्धि को कम कर के और ऑफसेट के माध्यम से कार्बन में कमी प्राप्त करते हैं। 

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के अनुसार GMR के नेतृत्व में हवाई अड्डे का संचालन करने वाला संकाय आवश्यक प्रदुषण नियंत्रण प्रणालियों और सुरक्षा उपायों को उपयोग में लाकर एयरपोर्ट में होने वाली गतिविधियों को पर्यावरण के प्रतिकूल बनाने में प्रतिबद्ध है। 

एयरपोर्ट को ईको फ्रेंडली बनाने के लिए उठाए जाएंगे कदम

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने हवाई अड्डे पर कई कार्यक्रम जैसे रिन्यूएबल एनर्जी उपयोग में लाना, ऊर्जा संरक्षण, एफिशिएंसी में सुधार, यात्रियों के कनेक्टिविटी नेटवर्क को स्थापित करना ,ग्रीन एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना और हितधारकों के पार्टनरशिप प्रोग्राम आदि को शुरू किया है।

एयरपोर्ट पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा, सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, कम ऊर्जा इस्तेमाल करने वाला लाइटनिंग सिस्टम, एडवांस फ्यूल हाईड्रेन्ट सिस्टम आदि की शुरुआत करी जाएगी। यह प्रोग्राम हवाई अड्डे को पर्यावरण के अनुकूल और कम ऊर्जा इस्तेमाल करने के इंफ्रास्ट्रक्चर को सहयोग करेंगे। इसके इलावा DIAL ने कई तकनिकी उपायों के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहनों और टैक्सीबॉट्स को उपयोग में  में लाया जायेगा।  

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