मुख्य बिंदु

साल 1932 में जेआरडी टाटा ने टाटा एयरलाइंस की शुरुआत की।
1946 में टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया। कंपनी एक पब्लिक लिमिटेड बन गई।
1948 में 8 जून को एयर इंडिया ने मुंबई से लंदन की अपनी पहली इंटरनेशनल उड़ान भरी।
1953 में एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया बनी।
1954 में टोक्यो, बैंकॉक, सिंगापूर और हांगकांग की फ्लाइट शुरू हुई।
1962 में एयर इंडिया दुनिया की पहली ऑल जेट एयरलाइन बनी।
1997 में कंपनी ऑनलाइन हो गई और वेबसाइट लॉंच की।
2007 में भारत सरकार ने इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया को मर्ज कर दिया।
2018 में सरकार ने एयर इंडिया के 76 % स्टॉक बेचने की घोषणा की, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला।
2020 में सरकार ने नए प्लान के तहत 100% एयर इंडिया को बेचने की घोषणा की।
अक्टूबर 2021 में टाटा ने 18000 करोड़ रुपए में एयर इंडिया को फिर से खरीदा।

एयर इंडिया की संस्थापक टाटा संस भारी घाटे में चल रही सरकारी इंडियन एयरलाइंस के लिए 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगा कर इसकी मालिक बन गई है। टाटा को कंपनी का 100 प्रतिशत कब्जा मिलेगा। नीलामी में टाटा समूह ने स्पाइसजेट के अजय सिंह की अगुआई वाले कंसोर्टियम को हराया, जिसने 15,000 करोड़ की बोली लगाई थी। सरकार ने आरक्षित मूल्य 12,906 करोड़ रखा था। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा, दिसंबर 2021 तक सौदे की सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। टाटा के हाथ ने सिर्फ एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की कमान आएगी, बल्कि एयरलाइन का ग्राउंड हैंडलिंग देखने वाली कंपनी एयर इंडिया सैट्स का भी आधा हिस्सा उसे मिलेगा।

इस डील से सरकार को मिलेगा 15 प्रतिशत

टाटा को इस डील के लिए सरकार को केवल 15 प्रतिशत यानी 2700 करोड़ रुपए देने होंगे। शेष 85 प्रतिशत राशि यानी 15,300 करोड़ का सरकारी कर्ज उसे चुकाना होगा। एयर इंडिया का कुल मौजूदा घाटा 65,562 करोड़ रुपये से अधिक है। एयरलाइन को प्रतिदिन लगभग 20 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। फिलहाल एयर इंडिया की 4400 घरेलू उड़ाने हैं और विदेश में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट भी हैं। सरकार ने साल 2017 में ही एयर इंडिया की नीलामी के प्रयास शुरू कर दिए थे, लेकिन तब किसी भी कंपनी ने कोई भी रूचि नहीं दिखाई थी।

5 साल तक टाटा कंपनी को बेच नहीं सकेगी

टाटा समूह अगले 5 साल तक एयर इंडिया को इसी नाम से चलाएगा। 5 साल बाद ही टाटा को एयर इंडिया को बेचने का नाम बदलने की अनुमति होगी। इसके साथ ही किसी विदेश व्यक्ति या कंपनी को बेच नहीं पाएंगे। इसके साथ ही डील के मुताबिक पहले साल किसी भी कर्मचारी को निकला नहीं जाएगा। लेकिन दूसरे साल से वीआरएस दिया जाएगा। सभी को प्रोविडेंट फंड मिलेगा और ग्रेच्युटी भी।

रतन टाटा ने ट्वीट कर कहा, वेलकम बैक एयर इंडिया

ट्वीट पर एक बयान जारी करते हुए उन्होंने लिखा, ‘टाटा समूह का एयर इंडिया के लिए बोली जीतना अच्छी खबर है। हम यह स्वीकार करते हैं कि एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी होगी। लेकिन इसी के साथ-साथ विमानन क्षेत्र में टाटा समूह की मौजूदगी उसे बाजार में आगे बढ़ने का मजबूत अवसर देगी।’ उन्होंने निजी क्षेत्र के लिए सरकार की हालिया नीतियों को धन्यवाद कहा।

रतन टाटा ने आगे लिखा, ‘भावनात्मक रूप से कहूं तो जेआरडी टाटा के नेतृत्व में एयर इंडिया ने कभी दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइन का रुतबा हासिल किया था। टाटा के पास अब उसी छवि को दोबारा हासिल करने का मौका है। अगर वह आज हमारे बीच होते तो बेहद खुश होते। हमें सरकार का भी शुक्रिया अदा करने की जरूरत है, जो हाल ही में चुनिंदा उद्योगों को निजी क्षेत्रों के लिए खोलने की नीति लेकर आई है। वेलकम बैक एयर इंडिया।’

 

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