भारतीय उपद्वीप के पश्चिमी तट की यात्रा करते समय, गोवा एक ऐसा आदर्श समुद्र तट का स्थान है, जो संपूर्ण प्रशंसा अपनी ओर आकर्षित कर लेता है, और अक्सर समुद्री तटों के विषय में गोवा के परे मानव दृष्टि पहुँच ही नहीं पाती है। लेकिन सुंदर समुद्र तटीय शहर 'कारवार' , गोवा के समान प्रशंसा के योग्य है, या यूँ कहिये जिन लोगों को शांति पसंद है, उन लोगों के लिए 'कारवार' शायद गोवा से बढ़कर अज़ीज़ साबित होगा। दक्षिणी भारतीय राज्य, कर्नाटक में अरब सागर और काली नदी के अद्वितीय संगम पर स्थित, करवार में निर्विवाद रूप से शांतिपूर्ण समुद्र तट, जलीय रोमांच की प्रचुरता और प्राकर्तिक सौंदर्य की पराकाष्ठा आपकी आंखों के लिए वरदान के सामन है।

सुनहरे बीच को धोने वाली अरब सागर की नीली लहरें और हरी भरी पहाड़ियां आंखों और अंतर्मन को सुकून पहुंचाती है। सूर्यौदय होने के समय समुद्र और ज़मीन दोनों एक मंद रौशनी से लिप्त होती हैं। लोग नहीं जानते की इस बीच की सुंदरता का कितना गहन प्रभाव 'रबीन्द्रनाथ टैगोर' पर पड़ा जो उस समय के युवा कवि थे।

टैगोर ने 'कर्नाटक का कश्मीर' नाम दिया



आज भी भारत के अन्य प्रसिद्द बीचों की तुलना में इस बीच में बहुत लोगों का आवागमन नहीं है। तो यह निश्चित रूप से आश्चर्यजनक नहीं होगा की लगभग एक सदी पहले यह और अकेला और मानव स्पर्श से अनछुआ ही होगा। यही वह शांतिपूर्ण स्थान है जिसने युवा 'रबीन्द्रनाथ टैगोर' को अपनी ओर आकर्षित कर लिया था, जब वे यहां अपने बड़े भाई 'सत्येन्द्रनाथ टैगोर' से मिलने आये थे, जो 'कारवार' में एक ज़िला न्यायाधीश के रूप में 1882 में कार्यभार संभाल रहे थे। कारवार बीच की प्राकर्तिक सुंदरता ने रबीन्द्रनाथ टैगोर के भीतर के दार्शनिक को जन्म दिया।



जीवन की वास्तविकताओं पर विचार करते हुए, उन्होंने अपना पहला काव्य नाटक प्राकृत प्रतिसोध (जिसका अर्थ है प्रकृति का बदला) लिखा था। हालाँकि, रबीन्द्रनाथ टैगोर ने पहले ही साहित्यिक लेखन शुरू कर दिया था, कारवार में प्रकृति के साथ उनके संवाद ने उन पर गहन प्रभाव डाला, जो उनके बाद के लेखन में स्पष्ट देखा जा सकता है। यह करिश्माई शहर गोवा से 76 किमी की दूरी पर स्थित है।

जानकारों का कहना है की टैगोर कानवार के सौंदर्य से इतने प्रभावित हो गए थे, की उन्होंने यहां के शांत और मनोरम समुद्र तटों के कारण इस स्थान को कर्नाटक का कश्मीर कहा। जब आप यहां आएं तो माजली बीच, तिलमती बीच, बिनगा बीच, कारवार बीच, कूदी बाग बीच और देवबाग बीच अवश्य जाएँ।

रोमांच के शौक़ीन लोगों के लिए बेहतरीन जगह।



अतुलनीय सुंदरता के साथ कारवार बीच पर आप कई रोमांचक और साहसी कार्यों में भी सलंग्न हो सकते हैं। कारवार के वाटर स्पोर्ट्स वो है जो आपको तरों ताज़ा कर देंगे स्नोर्केलिंग, कयाकिंग और डॉल्फिन स्पोटिंग यहां के समुद्र तटों पर उपलब्ध प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स हैं। करवार में बोट जेट राइड है, जो पर्यटकों को बेहद पसंद आती है, और यहां तक कि बीच पर पैरामोटरिंग भी काफी लोकप्रिय है। समुद्र तट के ऊपर और अरब सागर के ऊपर से उड़ते हुए आप कुछ ऐसे मनोरम दृश्यों के साक्षी बनेंगे जिन्हे आप जीवन भर नहीं भुला सकेंगे।



करवार में कुछ प्रमुख मंदिर जैसे, करवर श्री नागनाथ मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर, मल्लिकार्जुन मंदिर के दर्शन करके आपकी इस रमणीय यात्रा में एक आध्यात्मिक अंश भी जुड़ जाएगा। इसके अलावा, करवर एक्वेरियम को आप यहां रहकर बिलकुल भी नहीं छोड़ नहीं सकते, खासकर अगर आपके साथ बच्चे हैं ! उन सभी के लिए जो ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों और संग्रहालयों के प्रशंसक हैं, उनके लिए कारवार का वॉरशिप म्यूजियम और सादाशिवगढ़ फोर्ट बेहद देखने योग्य हैं।

नॉक नॉक (Knock Knock)



पश्चिमी घाट और समुद्र तटों का एक अद्भुत सम्मलेन, करवार की यात्रा का सबसे अच्छा समय ठण्ड के महीनों के दौरान है ! दूर तक फैली हुई सफ़ेद रेत और अत्यंत स्पष्ट नीले पानी के साथ कारवार उन सभी के लिए एक ऊतम यात्रा है, जो केवल कुछ समय के लिए पाँव पसारकर सूरज की किरणों को समुद्र में जगमगाता हुआ देखना चाहते हैं।

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