महामारी के खिलाफ राज्य की लड़ाई के बीच, लखनऊ का किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी पूरे उत्तर प्रदेश के रोगियों की एक बड़ी संख्या का इलाज करके इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। नवीनतम घटना के अनुसार, संस्थान के डॉक्टरों ने एक ‘ऑटोइम्‍यून डिस्‍ऑर्डर’ (Autoimmune disorders) के साथ एक संक्रमित गर्भवती महिला का आसानी से प्रसव कराने में मदद करके दो लोगों को नया जीवन दान दिया। एक स्वस्थ बच्ची को जन्म देते हुए, 35 वर्षीय महिला ने कोरोना वायरस जैसी विषम बीमारी के खिलाफ जीत हासिल की।

पिता और परिवार के लिए खुशी और राहत का क्षण

‘Idiopathic Thrombocytopenic Purpura’ (आईटीपी) से प्रभावित, दीपिका तिवारी अपनी डिलीवरी के समय गंभीर हालत में थीं। यह रोग रक्त प्लेटलेट्स को नष्ट कर देता है, जिससे त्वचा से आंतरिक रक्तस्राव (internal bleeding) होती है। अनिश्चितताओं के बावजूद, केजीएमयू के डॉक्टरों द्वारा देखभाल और उपचार ने महिला और बच्चे को सुरक्षित रखने में मदद की।

सी-सेक्शन सर्जरी के जरिए बच्चे को जन्म देने के बाद, मां और बच्चा दोनों स्थिर और स्वस्थ थे और अब उन्हें छुट्टी दे दी गई है। नवजात शिशु के पिता शैलेंद्र तिवारी खुशखबरी सुनकर बहुत खुश हुए। उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि मां-बेटी की जोड़ी ठीक और स्थिर है, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

डीन, चिकित्सा और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर उमा सिंह ने कहा, “दीपिका तिवारी, 38 सप्ताह और छह दिन की गर्भावस्था के साथ, 15 मई को पेट दर्द की शिकायत के साथ क्वीन मैरी अस्पताल आई थी, जहां वह कोविड पॉजिटिव पाई गई थीं। प्रोटोकॉल के अनुसार, उनको RALC भवन में कोविड अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। परीक्षणों से पता चला कि उनकी प्लेटलेट काउंट 18,000 सेल्स (cells)/ माइक्रोलीटर थी और साथ ही वह ITP की रोगी भी थी । “

मरीज़ को ₹3 लाख की दवा नि:शुल्क दी गई 

डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे और वयस्क दोनों ITP से प्रभावित हो सकते हैं। जहां बच्चों में यह रोग खुद ठीक हो जाता है, वहीं आमतौर पर वयस्कों को इससे ठीक होने में बहुत लंबा समय लगता है। वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि आईटीपी 1 लाख लोगों में से 3 लोगों में पाया जाता है। इस बिमारी में प्रमुख चिंताओं में से एक प्लेटलेट काउंट में गिरावट है, जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। यदि गिनती 10,000 यूनिट प्रति माइक्रोलीटर से कम हो जाती है तो आंतरिक रक्तस्राव को रोकना कठिन हो जाता है।

जटिलताओं को देखते हुए, गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव में मदद के लिए चार यूनिट प्लेटलेट्स दिए गए। इसके अलावा, डॉ. उमा सिंह ने बताया कि इस मरीज को इंट्रावेनस इम्युनोग्लोबुलिन (intravenous immunoglobulin) 80 जीएम, जिसकी कीमत ₹3 लाख है, को मुफ्त दिया गया। स्टाफ के प्रयासों को देखते हुए केजीएमयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन पुरी ने इस उपलब्धि के लिए स्त्री रोग विभाग के डॉक्टरों की सराहना की।

– आइएनएस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार

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