खज़ान गोवा के आदिवासी समुदायों में प्रचलित पारंपरिक कृषि प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, यह खेती जल अभियंत्रण का एक शानदार नमूना है जिसमे जल प्रबंधन के ज़रिये कृषि का एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विक्सित किया जाता है जो ख़ास तौर पर सागर के खारे पानी और उसमे आने वाले ज्वार के विनियमन पर आधारित है।। मछुआरों और किसानों के बीच संसाधनों के समान बंटवारे के लिए स्थानीय समुदायों द्वारा इसका प्रबंधन किया जाता है। हालांकि, पूरे गोवा में तेज़ी से शहरीकरण और विकास के साथ, इतिहास की यह संरचनाएं विलुप्त होती जा रही हैं। आज हम ऐसी ही एक परंपरागत प्रणाली खज़ानों के महत्व और इतिहास पर एक नज़र डालते हैं, जो अपने समय से बहुत आगे थी।

इस तरह काम करती थी खज़ान प्रणाली

सदियों पहले इस इलाके के लोगों ने निचले खारे पानी के बाढ़ के मैदानों और मैन्ग्रोव वनों को खेती के अनुकूल बनाया। स्थानीय तरीकों का इस्तेमाल करके उन्होंने कुछ ऐसे मेड़ बनाये जिससे खारे पानी के प्रवेश को रोका जा सके ताकि मैन्ग्रोव वनों को महफूज़ रखा जा सके।

इस कृषि प्रणाली का एक हिस्सा स्लुइस गेट (जिसे खज़ान गेट भी कहा जाता है) है जो कृषि क्षेत्रों में विशेष रूप से उच्च ज्वार के दौरान जल प्रवाह को नियंत्रित करता है। खज़ान भूमि के आखिरी छोर पर एक गड्डा होता है, जिसे ‘पोइम’ कहते हैं। यह कृषि क्षेत्र को उच्च ज्वार से होने वाले नुकसान से बचाता है तथा अतिरिक्त जल के लिये एक भंडार के रूप में भी कार्य करता है। इस जल के भंडार में मछली, केकड़ा और झींगे का पालन पोषण किया जाता है, जो ज्वार प्रवाह के दौरान एक बड़े जाल की सहायता से फँस जाते हैं। अधिक जल को नियंत्रित करके उसका उपयोग धान की खेती के लिये किया जाता है।

खज़ान भूमि का प्रत्येक हिस्सा महत्त्वपूर्ण है, जिसे कुशलता से प्रयोग किया जाता है। इन मैड़ों का उपयोग विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ उगाने में किया जाता था।

खज़ान से जुड़ी हुई हैं कई सांस्कृतिक गतिविधियाँ



 


अपनी स्थापना के बाद से, खज़ान प्रणाली को गोवा की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है, इससे कई लोककथाओं, गीत और नृत्य भी जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, मगरमच्छ का मुखौटा पहने पुरुषों द्वारा किया जाने वाला मचनी नृत्य या मगरमच्छ नृत्य, खज़ान के विकास से जुड़ा है। इसके अलावा, एक अन्य संबंधित कला रूप ज़ागोर है और यह ज्यादातर मछली पकड़ने वाले समुदाय द्वारा किया जाता है, जो खज़ान भूमि के पास रहते हैं।

नॉक-नॉक

खज़ान प्रणाली ज्यादातर जुआरी और मंडोवी नदी घाटियों में पाई जाती है, इसलिए अगली बार जब आप इन नदियों के किनारे जाएं, तो खज़ान क्षेत्र का पता लगाएँ। इसके अलावा,  इस सदियों पुरानी कृषि पद्धति के बारे में अधिक जानने के लिए आप यहां के स्थानीय लोगों से बात भी कर सकते हैं, लेकिन इस दौरान मास्क पहनना और कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करना न भूलें!

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