गोवा से लगभग 110 किमी दूर कोंकण तट पर स्थित एक आकर्षक शहर, वेंगुर्ला ने इतिहास में एक प्रसिद्ध बंदरगाह शहर के रूप में खुद को स्थापित किया है। हालांकि, अब यह ऊंचे पहाड़ों के बीच बसे रेतीली तटरेखा के लिए पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। आइए इस छोटे से शहर की विशेषताओं को करीब से जानते हैं!

यह द्वीप अब दुर्लभ भारतीय स्विफ्टलेट पक्षी के लिए एक प्रजनन स्थल है

मराठा प्रमुख छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल के दौरान, वेंगुर्ला सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र था। इस शहर के समृद्ध व्यापारिक अतीत में वेंगुर्ला जेट्टी, विशाल गोदामों और सत्रहवीं शताब्दी के डच कारखाने के खंडहरों सहित अन्य स्थानों के अस्तित्व समाए हुए हैं।

इसके अलावा, यह माना जाता है कि सत्रहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी के बीच, वेंगुर्ला को दो बार पूरी जला दिया गया। यही कारण है कि वेंगुर्ला चट्टानें, जिनकी नक्काशी आग के हमलों की गवाही देती है, को लोकप्रिय रूप से बर्नट आइलैंड के रूप में जाना जाता था। कभी समुद्री खोजकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान, आज यह द्वीप दुर्लभ भारतीय स्विफ्टलेट पक्षी के लिए एक प्रजनन स्थल है।

कई धार्मिक स्थलों का घर है यह जगह

हालांकि वेंगुर्ला खरीदारी के लिए प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन यहां स्थित समुद्र तट आपके मन को बहुत शांति प्रदान करते हैं। खूबसूरत समुद्र तटों की सूची में निवती बीच, शिरोडा बीच, मोचेमड बीच, सागरेश्वर बीच और वायंगनी बीच शामिल हैं। इसके अलावा, धार्मिक स्थलों की तलाश करने वाले पर्यटक इस शहर के प्रसिद्ध मंदिरों- मौली देवी मंदिर, सटेरी देवी मंदिर और श्री विठोडा मंदिर के दर्शन करने जा सकते हैं।

नॉक-नॉक

वेंगुर्ला में घूमना की जल्द से जल्द योजना बनाएं और अपनी यात्रा के दौरान कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करना न भूलें।  इस शहर में स्थित विभिन्न भोजनालयों से स्वादिष्ट समुद्री भोजन की खोज करें और इसके बेजोड़ स्वाद का आनंद लें। साथ ही, यहां सोल कढ़ी और कोकम का लुत्फ उठाना न भूलें। हमें आशा है, वापिस लौटने वक्त आपके पास यहां की खूबसूरत यादों के साथ यहां के खाने का स्वाद और इस जगह की अद्भुत सुंदरता को अपने दिल में कैद कर लेंगे।

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