शनिवार को, भारत के विदेश मंत्री ने क्वीन केतेवन, काखेती (पूर्वी जॉर्जिया में एक साम्राज्य) की रानी, के अवशेषों को जॉर्जिया सरकार को सौंप दिया। जॉर्जिया की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए आखिरकार, भारत ने अस्थियों के एक हिस्से को जॉर्जिया को उपहार के रूप में दे दिया। वहां के लोगों के लिए यह एक बेहद भावुक पल था क्योंकि वहां इसे पवित्र व पूजनीय माना जाता है। राजधानी त्बिलिसी में एक कार्यक्रम में अवशेंषों को चर्च में रखा गया था।

दोनों देशों के रिश्ते होंगे मज़बूत

जॉर्जिया में इस पवित्र खज़ाने की वापसी से भारत और जॉर्जिया के बीच राजनयिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यह दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान का भी प्रतीक है। दोनों सरकारों के इस फैसले से संबंधित देशों के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

 रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री ने कहा कि इन पवित्र अवशेषों को सौंपने का दिन सिर्फ जार्जिया के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी खास है। उन्होने उम्मीद जताई कि भारत और जार्जिया के लोग इन पवित्र अवशेषों की भावना के मुताबिक अध्यात्म और दोस्ती के रिश्ते को मजबूत करेंगे।

ऐसे हुई अवशेषों की खोज

ऐसा माना जाता है कि 1627 में, रानी केतेवन की मृत्यु के तीन साल बाद, पुर्तगाली मिशनरी उनके अवशेषों को गोवा लेकर आए थे। हालांकि, इन अवशेषों को कई वर्षों तक ‘खोया हुआ’ माना गया, मध्ययुगीन पुर्तगाली अभिलेखों के अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं ने पुराने गोवा के सेंट ऑगस्टीन चर्च में इसकी खोज़ की।

आखिरकार 2005 में एएसआई ने हैदराबाद के सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में डीएनए का विशलेषण किया, ताकि अवशेषों की पहचान और प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सके, और 2021 में इसे जॉर्जिया को वापस कर दिया गया। इससे पहले, 2017 में, भारत सरकार ने महारानी के इन अवशेषों को छह महीने के लिए एक प्रदर्शनी के लिए जॉर्जिया भेजा था। 23 सितंबर, 2017 को जॉर्जिया के कैथोलिकोस-पैट्रिआर्क द्वारा कई जॉर्जियाई लोगों के साथ अवशेषों का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया गया था। अवशेषों को और छह महीने की अवधि के लिए वहां रखा गया और 30 सितंबर 2018 को इसे भारत को लौटा दिया गया।

क्वीन केतेवन की कहानी

वर्षों के राजनयिक प्रयासों के बाद, क्वीन केतेवन को आखिरकार उनके अंतिम विश्राम स्थल- जॉर्जिया ले जाया गया। उनकी कहानी वर्ष 1624 में शुरू हुई थी, जब ईरान के सफविद राजवंश के शासन के दौरान शिराज में रानी को यातना दी गई और मार डाला गया, क्योंकि उसने ईसाई धर्म से इस्लाम में परिवर्तित होने से इनकार कर दिया था। उनके अवशेष दो ऑगस्टिनियन भिक्षुओं द्वारा भारत लाए गए थे, जिन्होंने पृथ्वी पर क्वीन केतेवन के अंतिम वर्षों के दौरान उन्हें देखा था। संत केतेवन के नाम से भी जानी जाने वाली रानी केतेवन की शहादत आज भी साहस और बलिदान की प्रेरणा देती है।

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