नारियल की कटाई को आसान बनाने के लिए केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (Central Coastal Agricultural Research Institute) और गोवा विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से ‘फ्लाई-कोकोबोट’ डिजाइन किया है। राष्ट्रीय मान्यता से सम्मानित, यह अत्याधुनिक तकनीक एक सरल, नवीन और लागत प्रभावी उत्पाद है जो तटीय कृषि पद्धतियों के परिदृश्य को बदल देगा। फ्लाई-कोकोबोट एक रिमोट-नियंत्रित, निहत्थे और जेंडर न्यूट्रल उपकरण है जो नारियल के आसपास उड़ता है और आसानी से फल काटता है, जिससे ऊंचे पेड़ की छाल पर चढ़ने की कठिनाई से राहत मिलती है।

फ्लाई कोकोबोट बनाएगा दोहरी फसल प्रणाली को आसान 

आईसीएआर-सीसीएआरआई और गोवा यूनिवर्सिटी ने मिलकर लंबे समय तक किए गए प्रयासों के बाद, आखिरकार एक ऐसा उत्पाद पेश किया है जो कृषि प्रौद्योगिकी का एक अनुकरणीय नमूना है। फ्लाई-कोकोबोट एक अनूठा और टिकाऊ उपकरण है, जिसने नारियल और काली मिर्च के बागानों की उपज की कटाई में अपनी उत्कृष्टता साबित की है, वर्तमान में इसकी क्षमता और कार्य किसी भी मानव या मानव रहित उपकरण से बेहतर है।

इस उपकरण की उपलब्धता विभिन्न किसानों को दो फसलों के संयोजन वृक्षारोपण प्रणाली (combination plantation system) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। पैडेलिस (पारंपरिक नारियल हार्वेस्टर) आमतौर पर नारियल के पेड़ पर चढ़ने में कठिनाई के कारण दोहरी फसल प्रणाली (dual cropping system) से बचते हैं।

इस उपकरण के प्रोटोटाइप डिजाइन को अन्य ताड़ जैसे सुपारी, पाल्मायरा पाम, ऑयल पॉम और यहां तक ​​कि खजूर के फलों को इकट्ठा करने के योग्य भी बनाया जा सकता है।  छिड़काव और छंटाई जैसे खेत के कामों को करने के लिए मॉडल डिजाइन को भी मॉडिफाई किया जा सकता है।

कृषि तंत्र को बढ़ावा देने के लिए 2021 में आईसीएआर के नेशनल एग्रीकल्चर हायर एजुकेशन प्रोजेक्ट (National Agriculture Higher Education Project) ने ‘कृतज्ञ एगटेक हैकथॉन’ शुरू किया गया था। फ्लाइंग-कोकोबोट को यहां भी पेश किया गया था और देश भर में 784 टीमों का मुकाबला करते हुए, इस प्रोटोटाइप डिजाइन ने चयनित हुई 89 टीमों के बीच ज़ोनल स्तर पर अपना स्थान बनाया और राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने वाली 25 टीमों में भी स्थान प्राप्त किया।

डिवाइस ने नवीनता (novelty), नवाचार (innovation), concept, cost-effectiveness और practical feasibility में पहला स्थान हासिल किया। गोवा टीम को ड्रोन डिजाइन के लिए 31 मई को एक राष्ट्रीय वर्चुअल कार्यक्रम में प्रमाण पत्र और ₹5 लाख की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया, जिसमें आईसीएआर-सीसीएआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक (बागवानी) अदावी राव देसाई और छात्र, अभिराज पेडनेकर और अरमान शेख शामिल थे।

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