महामारी की शुरुआत के साथ ही गोवा के पर्यटन में तेज गिरावट देखी गयी। इसके अलावा, राज्यव्यापी कर्फ्यू ने दूध, अंडे, मांस और कृषि उपज जैसे आवश्यक सामानों की सप्लाई को प्रभावित किया है। इसी कारण मांग और सप्लाई के बीच के गैप को कम करने के लिए आर्गेनिक खेती और उससे संबंधित स्थानीय प्रथाओं को बढ़ावा दिया गया है। इन घटनाओं को देखते हुए,राज्य सरकार ने एक आर्गेनिक फार्मिंग विश्वविद्यालय स्थापित करने और किसानों की सहायता के लिए अन्य चीजों के साथ सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया है।

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोवा सरकार क्या कर रही है?

गोवा के मुख्यमंत्री इंटीग्रेटेड खेती के तरीकों का समर्थन करते हैं और कहते हैं कि तटीय राज्य को निकट भविष्य में पूरी तरह से जैविक घोषित करने की क्षमता है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्मीकल्चर में वृद्धि हो सकती है और प्राकृतिक फ़र्टिलाइज़र की मांग बढ़ सकती है। अतः राज्य में जैविक कृषि संस्कृति को  लोकप्रिय बनाने के प्रयास में जल्द ही एक आर्गेनिक फार्मिंग विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी।

माना जाता है कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक शिक्षा संस्थान की स्थापना की जा रही है, जो इस क्षेत्र को अधिक बढ़ावा देकर कृषि ज़मीन को भी अधिक उपयोगी बनाएगा। कृषि मंत्री ने इस कदम की सराहना की और कहा – “यह युवाओं को एक नई दिशा भी देगा।”

इसके अलावा, गोवा के कृषि विभाग ने भी इस सप्ताह की शुरुआत में कृषि मंत्री के नेतृत्व में 500 जैविक खेती समूहों की समीक्षा की, ताकि जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सके। ये जैविक खेती समूह राज्य के सभी 12 रेवेन्यू सब-डिवीज़न में 10,000 हेक्टेयर भूमि में फैले हुए हैं, और 12,000 रजिस्टर्ड किसानों द्वारा चालये जाते हैं, जिनके पास छोटी जोत है।

गोवा आर्गेनिक फार्मिंग को क्यों बढ़ावा दे रहा है?

गोवा में पारंपरिक कृषि में धान, काजू, नारियल और मौसमी सब्जियों और दालों जैसी फसलों की खेती शामिल है। हालांकि, रियल एस्टेट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, श्रम लागत में बढ़ोतरी और हर पीढ़ी के साथ कृषि में लोगों की हिस्सेदारी कम होने से सर्विस सेक्टर में माइनिंग, पर्यटन और रोजगार की तुलना में खेती कम आकर्षक हो गयी है।

इसलिए, गोवा सरकार ने 2018 में जैविक खेती समूहों को प्रोत्साहित करने और किसानों को जैविक खेती प्रथाओं में ट्रेनिंग करने के लिए एक पहल शुरू की। लेकिन, महामारी के बाद राज्य के निवासियों द्वारा सामना की जाने वाली आवश्यक वस्तुओं की कमी के साथ जैविक खेती को वास्तविक बढ़ावा मिला। अब, अधिकारी किसानों को उनकी उपज में भी मदद करके इस कृषि पद्धति के उद्देश्य में सहायता कर रहे हैं।

क्यों फायदेमंद है आर्गेनिक फार्मिंग?

आर्गेनिक फार्मिंग पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक फायदेमंद है क्योंकि यह छोटे खेतों को लाभ पैदा करने वाले उद्यमों में बदल सकती है। इसके अलावा, गोवा के कृषि डायरेक्टर ने कहा कि अगर किसान कीटनाशकों और रासायनिक केमिकल का उपयोग करने से परहेज करते हैं, तो वे आर्गेनिक इनपुट पर 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं, इसलिए यह अधिक कॉस्ट इफेक्टिव भी है। 

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