मुख्य बिंदु:

गोवा में फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने दैनिक कार्यों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

ऐसी फर्मों को अगले दो से तीन वर्षों की अवधि के भीतर पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करना पड़ सकता है।

इस योजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए, गोवा सरकार एक नई नीति पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य प्रशासन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने दैनिक कार्यों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने के निर्देश देने की योजना बना रहा है। योजना के अनुसार, ऐसी फर्मों को अगले दो से तीन वर्षों की अवधि के भीतर पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करना पड़ सकता है।

योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा

रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पहले साल में 25% वाहनों को बदलना होगा। इसके बाद 50 फीसदी वाहनों को दूसरे वर्ष में परिवर्तित किया जाएगा और तीसरे वर्ष के अंत में शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया जाएगा। गोवा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन पॉलिसी का मसौदा तैयार करने के लिए हाल ही में आयोजित वर्चुअल मीटिंग में इस संबंध में एक घोषणा की गई है।

इसके अलावा, यह बताया गया है कि नगर निगमों द्वारा अपशिष्ट संग्रह के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहनों को भी इस योजना में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार दो, तीन और चार पहिया वाहनों को कवर करते हुए एक व्यापक सब्सिडी कार्यक्रम को लागू करने की भी योजना बना रही है।

गोवा में 50% फेरीबोट को भी इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा

गोवा सरकार बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण नीति पर काम कर रही है, जिससे सार्वजनिक और निजी दोनों प्रतिष्ठान लाभान्वित होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 तक गोवा की लगभग 50% फेरीबोट को भी इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल दिया जाएगा।

सर्विस स्टेशनों, रखरखाव इकाइयों और अन्य संबंधित सुविधाओं की स्थापना के साथ, राज्य में 10,000 से अधिक नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। अतिरिक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी ढांचे के उन्नयन में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में वृद्धि होगी। एक बार नीति के अंत में लागू हो जाने के बाद, गोवा में पर्यायवरण को लाभ मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

गोवा में कंपनियों को देनी पड़ सकती है लोगों को फ्री-टेस्ट ड्राइव

इस बीच, सरकार ने संभावित खरीदारों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ग्राहक से संबंधित मुद्दों को निपटाने के लिए 90 दिनों की अवधि अनिवार्य कर दी है। जनता की सिफारिशें लेने के बाद इस समय सीमा को घटाकर 30 दिन किया जा सकता है। इसके अलावा, कंपनियों को नई तकनीक से नागरिकों को परिचित कराने के लिए फ्री-टेस्ट ड्राइव भी देनी पड़ सकती है।

 

 

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